शनिवार, 24 मई, 2008 को 18:28 GMT तक के समाचार
गूजर आंदोलन को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक अब जयपुर की जगह दिल्ली में होगी.
जयपुर में तीन दिनों तक चलने वाली यह बैठक 31 मई से शुरू होने वाली थी.
भाजपा ने अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए नेताओं को पहली जून को दिल्ली बुलाया है और इसे दो दिनों में ही ख़त्म कर दिया जाएगा.
पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पार्टी के पदाधिकारियों ने एक बैठक में राजस्थान की स्थिति का आकलन करने के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में ही बुलाने का फ़ैसला लिया.
इसे संयोग ही कहा जाएगा कि राजस्थान राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ऐसा दूसरी बार हुआ है.
पिछले साल भी गूजरों के आंदोलन के ही कारण जयपुर में प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को दिल्ली में आयोजित करना पड़ा था.
अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की माँग को लेकर पिछले साल भी गूजरों के आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी.
गूजर चाहते हैं कि उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल कर लिया जाए ताकि उन्हें इस वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का फ़ायदा मिल सके.
इस साल शुक्रवार को फिर से गूजरों के आंदोलन ने उग्र रूप धर लिया है और अब तक 31 लोग मारे जा चुके हैं.
वसुंधरा की मुश्किलें
पिछले साल आंदोलन के बाद राज्य सरकार और गूजर नेताओं के बीच समझौते के तहत आरक्षण की माँग पर विचार के लिए चोपड़ा आयोग का गठन किया गया.
इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी लेकिन इसमें गूजरों को आरक्षण देने के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई ज़िक्र नहीं किया गया.
अब गूजरों का कहना है कि उन्हें चोपड़ा आयोग से कोई मतलब नहीं है और वे चाहते हैं कि राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने वादे के मुताबिक कार्यकाल ख़त्म होने से पहले आरक्षण देने की सिफ़ारिश केंद्र सरकार से करें.
गूजरों के दोबारा भड़के आंदोलन ने राज्य की वसुंधरा राजे सरकार के सामने मुश्किल पैदा कर दी है.
कुछ ही महीने बाद राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं और ऐसे समय में इस तरह के आंदोलन से पार्टी परेशान है.
भाजपा नेताओं की योजना थी कि जयपुर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के बहाने ही राज्य में चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी जाएगी.
कार्यकारिणी बैठक का स्थान बदलने वाली बैठक के बाद समाचार एजेंसियों से बातचीत में एक भाजपा नेता ने कहा, "राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान कोई भी व्यवधान मीडिया का ध्यान खींच सकता था और इससे नकारात्मक प्रचार मिलता."