शुक्रवार, 23 मई, 2008 को 02:47 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि बर्मा के सैन्य नेता सभी विदेशी सहायताकर्मियों को तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में जाने देने पर सहमत हो गए हैं.
बर्मा के दौरे पर गए बान की मून और सैन्य नेता जनरल थान श्वे के बीच शुक्रवार को हुई वार्ता में इस पर सहमति बनी.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है.
हालाँकि अभी ये तय नहीं है कि बर्मा सरकार विदेशी सहायताकर्मियों को वीज़ा जारी करेगी या सिर्फ़ इरावदी क्षेत्र में राहत सामग्री पहुँचाने की अनुमति देगी.
बर्मा की सैनिक सरकार पर राहत कार्य चालने में असमर्थ होने के आरोप लग रहे हैं लेकिन सैनिक नेताओं का कहना है कि स्थितियाँ पूरी तरह नियंत्रण में है.
इससे पहले तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा था कि तूफ़ान से हुई तबाही से अकेले निपटना बर्मा के बूते से बाहर है.
चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस से सबसे बुरी तरह प्रभावित इरावदी क्षेत्र में उन्होंने फ़सलों की बर्बादी और तबाह हुए गाँवों का मुआयना किया.
वो एक राहत शिविर में भी गए. उन्होंने कहा कि उनकी बर्मा यात्रा का मकसद यहाँ की सरकार को ज़्यादा सहायता स्वीकार करने के लिए राजी करना है.
इस तूफ़ान ने 78 हज़ार लोगों की जानें ली है और लगभग 56 हज़ार लोग अभी भी लापता हैं.
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
बान की मून ने चिंता जताई है कि संयुक्त राष्ट्र की सहायता लगभग पाँच लाख लोगों तक ही पहुँच पा रही है जबकि बर्मा में लगभग बीस लाख लोगों को तुरंत सहायता की ज़रूरत है.
एक विदेशी डॉक्टर ने बीबीसी से कहा कि अब भी बहुत से लोग छोटे-छोटे तालाबों से पानी पीने के लिए मजबूर हैं. डॉक्टर का कहना है था कि बच्चे और बुज़ुर्ग लोग दस्त, पेट की ख़राबी, डेंगू बुख़ार और अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं.
इस बीच बान की मून ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि उनकी यात्रा के ज़रिए बर्मा के तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों की भ्रामक तस्वीर देने की कोशिश की जा रही है.
बान की मून ने अपना बर्मा दौरा शुरू करते हुए कहा था कि लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए ना कि राजनीति को.