गुरुवार, 22 मई, 2008 को 09:17 GMT तक के समाचार
भारत में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार गुरुवार को सत्ता में अपना चौथा साल पूरा कर रही है.
ख़बरें हैं कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने रात्रि भोज का आयोजन किया है जिसमें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है.
अब तक इन दोनों दलों के नेताओं से कांग्रेस की पटरी नहीं बैठी है और आपस में भी ये दल एक दूसरे से भिड़े रहे हैं.
यूपीए सरकार के चार साल पूरे होने का मतलब है, चुनाव के लिए अब केवल एक साल बचा है.
माना जा रहा है कि अगले एक साल में कभी भी चुनाव का ऐलान किया जा सकता है.
प्रेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस के लिए यह कठिन समय की शुरुआत है.
पिछले चार साल में पार्टी के हाथ से कई राज्यों में सत्ता फिसली है. इसमें पंजाब, उत्तराखंड और केरल शामिल हैं.
दूसरी ओर कांग्रेस का उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में प्रदर्शन निराशाजनक रहा है.
वामपंथी नाराज़
हर साल की तरह इस साल भी मनमोहन सिंह की सरकार अपनी उपलब्धियाँ गिनाएगी. दूसरी ओर विपक्ष का मानना है कि यूपीए सरकार पूरी तरह नाकाम रही है.
इधर सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दल बढ़ती महँगाई, विदेशी पूंजी निवेश और निजीकरण जैसे कई मुद्दों को लेकर नाराज़ हैं.
हालांकि यूपीए सरकार अपनी उपलब्धियों में किसानों की कर्ज माफ़ी, रोज़गार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार और आर्थिक वृद्धि दर आठ फ़ीसदी को प्रमुख मानती है.
लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महँगाई से जूझने की है.
सरकार विदेश नीति के मोर्चे पर कई उपलब्धियाँ गिनाती है. अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता और पाकिस्तान के साथ शांति की पहल को वह बड़ी उपलब्धि मानती है.
प्रेक्षकों का कहना है कि कुल मिलाकर पार्टी की निगाहें एक बार फिर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के करिश्मे पर टिकी हैं.
'असफल सरकार'
मुख्य विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी सरकार के कामकाज को सिरे से खारिज करती है.
भाजपा का मानना है कि ये चार साल यूपीए सरकार की असफलता के साल रहे हैं.
पार्टी का मानना है कि यूपीए सरकार महँगाई और चरमपंथी हमलों को रोकने में विफल रही है. साथ ही कृषि क्षेत्र में वह पूरी तरह नाकाम रही है.
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं,'' महँगाई से आम आदमी परेशान है, कृषि व्यवस्था चौपट है जिसकी वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं, साथ ही चरमपंथी घटनाओं में वृद्धि हो रही है.''
उनका कहना है कि कांग्रेस केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और मेघालय में हारी और बिहार से यूपीए गठबंधन सत्ता से बाहर हुआ. ये सभी नतीजे उसके कामकाज के ख़िलाफ़ लोगों की राय हैं.