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मंगलवार, 20 मई, 2008 को 09:19 GMT तक के समाचार

चीन ने मानसरोवर यात्रा रोकी

चीन ने अपनी घरेलू समस्याओं का हवाला देते हुए भारत से कहा है कि हर साल होने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा को फ़िलहाल स्थगित कर दिया जाए.

भारत के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है और कहा है कि चीन ने 21 जून से पहले तीर्थयात्रियों के वहाँ जाने को रोकने को कहा है.

विदेश मंत्रालय ने बीबीसी को बताया कि इसके बाद कैलाश मानसरोवर जाने वाले पहले और दूसरे जत्थे को रोकने का निर्णय लिया है.

यात्रा तीसरे जत्थे से शुरु हो सकेगी और जैसा कि मंत्रालय ने बताया कि तीसरा जत्था 13 जून को रवाना होगा.

हालांकि चीन ने कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा को स्थगित करने के कारण ज़ाहिर नहीं किए हैं लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि लगभग इसी समय ओलंपिक मशाल तिब्बत के इलाक़े से गुज़रेगी और चीन नहीं चाहता कि उसमें किसी भी कारण से व्यावधान आए.

सूत्रों के अनुसार इस व्यावधान को टालने के लिए चीन भारतीय तीर्थयात्रियों को भी दूर रखना चाहता है.

चीन के इस अनुरोध को भारत ने स्वीकार कर लिया है.

नई तारीख़

पहले तय कार्यक्रम के अनुसार कैलाश मानसरोवर के लिए पहला जत्था पहली जून को रवाना होना था.

लेकिन चीन सरकार के अनुरोध के बाद भारत सरकार ने फ़ैसला किया है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा तीसरे जत्थे से शुरु हो.

तीसरे जत्थे के लिए विदेश मंत्रालय ने 13 जून की तारीख़ सुनिश्चित की है.

अभी यह तय नहीं है कि पहले दो जत्थों में जाने वाले लोगों को तीसरे या बाद के जत्थों में शामिल होने की अनुमति मिल सकेगी या नहीं.

विदेश मंत्रालय का कहना है कि वे चीन सरकार से इस संबंध में बात कर रहे हैं कि पहले दो जत्थों में जाने वाले लोगों को बाद के जत्थों में शामिल होने की अनुमति दे दी जाए.

पवित्र तीर्थ

मानसरोवर, तिब्बत के पठार में समुद्रतल से 14950 फ़ुट की ऊँचाई पर स्थित है.

उसके एक तरफ़ सिर उठाए खड़ा है कैलाश पर्वत और दूसरी तरफ़ है गुरला मान्धाता पर्वत. मानसरोवर की परिधि 88 किलोमीटर और गहराई 90 मीटर है.

जाड़ों में यह झील जमी रहती है और वसंत में पिघलनी शुरु होती है. कहते हैं कि चाँदनी रात में मानसरोवर का सौंदर्य पारलौकिक लगता है.

बर्फ़ से ढके शिखर, प्रकृति की निर्मल छटा और 320 किलोमीटर क्षेत्र में फैला जलपुंज.

यह झील हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए पवित्र तीर्थ स्थल है.

मानसरोवर तक पहुंचने के कई रास्ते हैं. भारत से ये रास्ता उत्तरांचल राज्य के अल्मोड़ा, धारचुला और लिपुलेख दर्रे से होकर तकलाकोट तक जाता है. यहीं से चीन की सीमा शुरु हो जाती है.

इस यात्रा के लिए लगभग एक महीने का समय लगता है.