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सोमवार, 19 मई, 2008 को 07:19 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

चुनावी हिंसा में मरने वालों की तादाद बढ़ी

पश्चिम बंगाल राज्य में रविवार को ग्राम पंचायत चुनावों में हुई हिंसा में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है जबकि सौ के करीब लोग घायल हो गए हैं.

बांग्लादेश की सीमा पर स्थित मुर्शिदाबाद ज़िले में हिंसा की सबसे ज़्यादा वारदातें हुईं जहाँ 15 लोग मारे गए.

अधिकारियों ने कहा कि ज़्यादातर मौतें चुनाव बूथ पर या विपक्षी दलों के समर्थकों के घर पर हुए हमलों में हुईं.

इस महीने तीन चरणों में हुए ग्राम पंचायतों के हिंसक चुनावों में अब तक 30 लोग मारे जा चुके हैं.

मुर्शिदाबाद के एक वरिष्ठ अधिकारी सुबीर भद्र ने बताया कि कई ग्रामीणों की मौत झड़पों में फ़ंसने की वजह से हुई है.

मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद और मालदा ज़िले विपक्षी दल कांग्रेस के गढ़ हैं.

आतंक का राज

बंगाल पर शासन कर रहे वामपंथी दल इस बार कांग्रेस से ज़्यादा पंचायतें हथियाने को तत्पर दिख रही है.

मुर्शिदाबाद से कांग्रेस सांसद अधीर चौधरी ने कहा, "मार्क्सवादी हमारे लोगों पर आतंकवाद लादना चाहते हैं जिसके विरोध में हमें लड़ना होगा."

मार्क्सवादियों ने चौधरी और उनके समर्थकों पर आतंक का राज शुरू करने का आरोप लगाया.

मारे गए ज़्यादातर लोग बम और गोलियों से तब मारे गए जब वे वोट देने के लिए कतारों में खड़े थे.

पुलिस को आशंका है कि वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा के वक्त भी हिंसा हो सकती है.

राजनीतिक विश्लेषक रजत रॉय कहते हैं, " ज़्यादातर जगहों पर वामपंथियों और ग़ैर-वामपंथियों के बीच ही लड़ाई हुई है लेकिन कुछ जगहों पर वामपंथी दलों में आपस में भी लड़ाइयाँ हुई हैं."

उन्होंने कहा, "पिछले दिनों हुए चुनावों में यह चुनाव शायद सबसे ज़्यादा हिंसक रहे हैं क्योंकि दलों ने हथियारों का प्रयोग किया है."

पश्चिम बंगाल में ग्राम पंचायतें राजनीतिक शक्ति हासिल करने का मुख्य स्रोत हैं इसलिए यहाँ के चुनावों से ज्यादा हिंसा इन चुनावों में हुई है.

इससे पहले वर्ष 2003 में हुए चुनावों में एक ही दिन हुई झड़पों में 19 लोग मारे गए थे.