सोमवार, 19 मई, 2008 को 15:03 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश के ढाका हाई कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि वहाँ रहने वाले क़रीब डेढ़ लाख उर्दू बोलने वाले मुस्लिम शरणार्थियों को बांग्लादेशी नागरिक कहलाने का हक़ होगा.
स्थानीय लोग इन मुस्लिम शरणार्थियों को बिहारी कहते हैं.
वर्ष 1947 में बंटवारे के वक़्त ये लोग भारत से उस समय पूर्वी पाकिस्तान कहे जाने वाले हिस्से में चले गए थे.
ढाका हाई कोर्ट का ये फ़ैसला उन लोगों पर लागू होगा जो बांग्लादेश की आज़ादी के समय 1971 में या तो नाबालिग थे या उसके बाद पैदा हुए.
लेकिन ऐसे लोगों को नागरिकता नहीं मिलेगी जो आज़ादी के समय व्यस्क थे.
संवाददाताओं का कहना है कि नागरिकता का मुद्दा बांग्लादेश में विवादास्पद रहा है कि क्योंकि युद्ध के समय इन लोगों ने पाकिस्तान का साथ दिया था.
जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र देश बना तो ये लोग बांग्ला भाषी इलाक़े में ही रह गए लेकिन इन्हें वापस जाने की अनुमति नहीं दी गई.
बांग्लादेश की राजधानी ढाका और देश के अन्य जगहों पर बने 60 से भी ज़्यादा शरणार्थी शिविरों में क़रीब तीन लाख बिहारी रहते हैं.
ये लोग ज़्यादातर बिहार के हैं और उर्दू बोलते हैं.
शरणार्थियों का कहना है कि बांग्लादेश में उनके साथ भेदभाव होता रहा है और आज भी उनके लिए नौकरी मिलना और बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाख़िल करवाना काफ़ी मुश्किल है.