सोमवार, 19 मई, 2008 को 06:29 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी के नेता को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तहत ग़िरफ़्तार कर लिया गया है.
ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली सरकार की केबिनेट में रहे जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख मतीउर रहमान निज़ामी ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इंकार किया है.
सौ से भी ज़्यादा राजनीतिज्ञों को भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों के तहत हिरासत में लिया जा चुका है. इन राजनीतिज्ञों में ख़ालिदा ज़िया समेत दो पूर्व प्रधानमंत्री भी शामिल हैं.
अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भी एक अलग मामले में अभियुक्त ठहराया है.
बांग्लादेश की सेना-समर्थित अंतरिम सरकार ने देश की राजनीति की कथित गंदगी को साफ़ करने का वायदा किया है और पिछले 18 महीनों जबसे उन्होंने सरकार संभाली है, सरकार ने साफ़ कर दिया है कि उसका रुख़ नरम पड़ने वाला नहीं है.
पुलिस ने देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी के प्रमुख निज़ामी को रविवार को आधी रात में भयंकर तूफ़ान और सैकड़ों समर्थकों के विरोध के बावजूद उनके घर से गिरफ़्तार किया.
प्रजातंत्र बहाली
रविवार को पुलिस ने निज़ामी का समर्थन करने वाले दो मंत्रियों को ग़िरफ़्तार किया था. इसके अलावा अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को एक और मामले में अभियुकत ठहराया गया था.
निज़ामी बांग्लादेश के सबसे महत्वपूर्ण कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं में से एक हैं. अपने ऊपर लगे आरोपों को उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताया.
निज़ामी पर ख़ालिदा ज़िया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के साथ जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन के समय ग़ैरक़ानूनी रूप से व्यापारिक ठेके दिलाकर फ़ायदे लेने का आरोप है.
पुलिस ने निज़ामी, उनके बेटे और 11 पूर्व मंत्री सहित 22 अन्य लोगों पर गै़रक़ानूनी सौदों में लिप्त होने का आरोप लगाया है.
इन सबका कहना है कि वे निर्दोष हैं.
सेना समर्थित सरकार ने वादा किया है कि वे साल के अंत तक प्रजातंत्र को बहाल कर देंगे. लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव में राजनीतिक दलों का नेतृत्व कौन करेगा क्योंकि कई प्रमुख राजनीतिक नेता तो सींखचों के पीछे हैं.