रविवार, 18 मई, 2008 को 00:54 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन स्थित एक संस्था ने कहा है कि बर्मा में दो हफ़्ते पहले आए समुद्री तूफ़ान की वजह से वहाँ के इरावदी डेल्टा में बच्चे भुखमरी का शिकार हो रहे हैं.
‘सेव द चिल्ड्रेन’ नाम की इस संस्था के मुताबिक तूफ़ान आने से पहले ही उन्होंने इन इलाकों में पाँच साल से कम उम्र के करीब तीस हज़ार कुपोषित बच्चों का पता लगाया था.
बर्मा की सैन्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के कई प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं. कई सरकारों ने बर्मा सरकार को तूफ़ान की समझ रखने विशेषज्ञ और अन्य साज़ो सामान भेजने की भी पेशकश की लेकिन उसे भी ठुकरा दिया गया.
‘सेव द चिल्ड्रेन’ संस्था का कहना है कि कुपोषण के शिकार हज़ारों बच्चे अब ज़्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहेंगे.
उधर बर्मा की सरकार ने पहले विदेशी डॉक्टर को भारत औऱ थाइलैंड की तरफ़ से देश में आने की इजाज़त दे दी.
अभी यह साफ़ नहीं है कि इन डॉक्टरों को कहाँ तैनात किया जाएगा.
तबाही
अमरीकी राजनयिकों के मुताबिक बर्मा में तूफ़ान से मारे जाने वालों की संख्या एक लाख से ज़्यादा हो सकती है.
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों ने राहत पर चिंता जताते हुए कहा है कि सहायता लोगों तक समय पर नहीं पहुँच पा रही है.
बर्मा में लगभग 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से समुद्री तूफ़ान नरगिस आया था जिसने इरावॉडी नदी के मुहाने से जुड़े इलाक़े में भारी तबाही मचाई थी.
सरकार का कहना है कि तूफ़ान से हज़ारों लोग मारे गए हैं.
बर्मा में अमरीका के दूतावास की प्रमुख शारी विलारोसा का कहना है कि प्रभावित इलाक़ों में 95 प्रतिशत इमारतों को नुकसान पहुँचा है और स्थिति बेहद ख़राब है.