शनिवार, 17 मई, 2008 को 07:52 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारूक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि भारत सरकार के पास दाऊद इब्राहिम के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं जिसके आधार पर पाकिस्तान उन्हें भारत को सौंप सके.
उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि भारत दाऊद इब्राहिम के गुनहगार होने के सबूत दे दे तो पाकिस्तान दाऊद को भारत को सौंप देगा.
हैदराबाद में एक पत्रकारवार्ता में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "मैं इस बयान से ख़ुश हूँ क्योंकि पाकिस्तान ने पहली बार अधिकारिक तौर पर ये माना है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है."
उनका कहना था कि भारत के पास दाऊद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं.
उल्लेखनीय है भारत को अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में कुख़्यात दाऊद इब्राहिम की 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के सिलसिले में तलाश है.
तब वह मुंबई में रहा करते थे.
सबूत
लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "जहाँ तक गुनहगार होने का सवाल है तो यह तय करना अदालत का काम है लेकिन दाऊद के मामले में कई तथ्य हैं."
उन्होंने कहा, "एक तो इंटरपोल ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है, अमरीका ने एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर रखा है और यह भी तथ्य है कि 1993 के बम विस्फोटों के सिलसिले में कई लोगों को सज़ा सुनाने वाली अदालत ने दाऊद को भगोड़ा घोषित कर रखा है."
भाजपा नेता ने कहा, "यह सब सबूत पाकिस्तान के लिए पर्याप्त हैं कि वह दाऊद को भारत को सौंप दे जिससे कि उन पर मुक़दमा चलाया जा सके."
यह पूछे जाने पर कि जयपुर में हुए विस्फोटों और भारत-पाक सीमा पर हुई गोलीबारी से क्या भारत और पाकिस्तान के संबंध ख़राब होने के संकेत मिलते हैं, उन्होंने कहा कि वे नहीं मानते कि संबंध ख़राब होने लगे हैं.
उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार का रवैया ऐसा होना चाहिए कि कुछ भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
उन्होंने कहा कि अगर भारत ऐसा करने लगे तो पड़ोसी देशों से भारत के रिश्ते सुधरने लगेंगे.
केंद्र पर ग़ुस्सा
लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि केंद्र सरकार की लापरवाही और नाकामी के कारण पूरब में बांग्लादेश और पश्चिम में पाकिस्तान की ओर से सीमा पार 'आतंकवाद' में बढ़ोत्तरी हुई है.
हैदराबाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि 'आतंकवाद' और बढ़ती क़ीमतों को काबू करने में वह विफल रही है.
आडवाणी ने कहा, "बढ़ती क़ीमतों को ना रोक पाने के कारण आम आदमी की आर्थिक सुरक्षा को ख़तरा पैदा हुआ है तो आतंकवाद पर क़ाबू न करने से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा ख़तरे में पड़ गई है."
उन्होंने आरोप लगाया कि जब से यूपीए सरकार सत्ता में आई है, देश में 'आतंकवादी' हमलों में तेज़ी आई है. आडवाणी ने कहा कि ऐसे हमलों के बाद आज तक दोषियों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र भी दाख़िल नहीं हुआ है और ना ही उन्हें अदालत में पेश किया गया है.
उन्होंने हैदराबाद के साथ-साथ हाल ही में जयपुर में हुए धमाकों का भी ज़िक्र किया. जयपुर धमाकों को रोक पाने में मिली नाकामी के लिए किसे ज़िम्मेदार माना जाए- राज्य सरकार को या केंद्र सरकार को, इसके जवाब में आडवाणी ने केंद्र पर भी ठीकरा फोड़ा.
आडवाणी ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बयान के मुताबिक़ आतंकवाद की जड़ें देश से बाहर हैं और इस बारे में राज्य सरकारों के साथ सूचना बाँटना केंद्रीय एजेंसियों का काम है. राजस्थान सरकार को किसी तरह की ख़ुफ़िया जानकारी नहीं दी गई थी."
दिल्ली, मुंबई, बंगलौर, अयोध्या, हैदराबाद और अजमेर में हुए धमाकों का ज़िक्र करते हुए आडवाणी ने कहा कि ऐसे हमलों का दायरा बढ़ता जा रहा है.
उन्होंने केंद्र सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की कि वह बांग्लादेशियों के घुसपैठ को रोक पाने में नाकाम रही है.