मंगलवार, 13 मई, 2008 को 10:05 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में आपातकाल के दौरान बर्ख़ास्त हुए जजों की बहाली के मुद्दे पर सहमति न बन पाने के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है उनकी पार्टी 'देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अस्थिर करने वाले किसी षड्यंत्र का हिस्सा नहीं बनेगी.'
महत्वपूर्ण है कि नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बीच बर्ख़ास्त जजों की बहाली के मुद्दे पर सहमति न होने पर नवाज़ शरीफ़ ने सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर होने का फ़ैसला किया है.
नवाज़ शरीफ़ ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी के मंत्री केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफ़ देने वाले हैं.
शरीफ़ चाहते हैं कि बर्ख़ास्त जज न केवल बहाल हो बल्कि उन्हें उनके सभी अधिकार वापस दिए जाएँ लेकिन पीपीपी उन्हें सीमित अधिकार ही देने के पक्ष में है.
मुद्दों पर समर्थन
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि सरकार से उनके मंत्रियों के बाहर जाने के बाद भी उनकी पार्टी पीपीपी के समर्थन वाली सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन देती रहेगी.
उनका कहना था, "हम ऐसे किसी भी षड्यंत्र का हिस्सा नहीं बनेंगे जिससे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया अस्थिर हो."
ग़ौरतलब है कि मात्र तीन महीने पहले पाकिस्तान में प्रदर्शनों और आंदोलन के बाद ऐतिहासिक आम चुनाव हुए थे.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के मंत्री अब किसी भी समय इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री को मिलेंगे और उन्हें अपने इस्तीफ़े सौंप देंगे.
दोनो ही पक्ष किसी भी तरह की दूरियों को ज़्यादा महत्व देने से कतरा रहे हैं लेकिन पर्यवेक्षक इस कदम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं और अनुमान लगा रहे हैं कि इससे अस्थिरता बढ़ सकती है.
बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच खाई बढ़ती है तो ये क]दम राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को समर्थन दे रही पार्टियों में नई जान फूँक देंगे.
शरीफ़ ने घोषणा की है कि वे रावलपिंडी में अगले माह होने वाले एक उप चुनाव में उम्मीदवार होंगे.
शरीफ़ ने अपने चुनाव प्रचार में जजों की बहाली का वादा किया था और गठबंधन सरकार में भाग लेने के लिए इसे एक शर्त भी बनाया था.
उधर पीपीपी की ओर से आए बयान में इस क़दम को - 'न्यायाधीशों की बहाली की प्रक्रिया में एक विराम - लेकिन पूर्ण विराम नहीं' की संज्ञा दी है.
पार्टी ने ये भी कहा है कि वह नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ चुनाव में अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी.