मंगलवार, 13 मई, 2008 को 23:16 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मंगलवार देर शाम एक के बाद एक हुए सात बम धमाकों के बाद शहर में दहशत फैल गई.
लोग फ़ोन पर एक-दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे. इससे शहर की टेलीफ़ोन लाइनें जाम हो गई थीं. वहीं शहर के प्रमुख अस्पताल सवाई मान सिंह (एमएमएस) में चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री का माहौल था.
धमाकों के बाद वहाँ का भयावह मंज़र देखकर कुछ लोग बेहोश होकर गिर पड़े.
शहर के दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और अपने घरों की ओर निकल पड़े. कुछ ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने में मदद की. धमाकों
के बाद शहर में यातायत जाम की स्थिति पैदा हो गई. सड़कों पर वाहन रेंग-रेंग कर चल रहे थे.
अस्पतालों में अफ़रा-तफ़री
एक घंटे तक मैं एक अस्पताल में रहा. अस्पताल में चारों तरफ़ अफरा-तफरी मची हुई थी. रोते-बिलखते लोग घायलों को लेकर पहुँच रहे थे. अस्पताल में एबुलेंसों का आना-जाना लगा हुआ था, जिसमें घायलों को लाया जा रहा था.
इसके अलावा आम लोग भी अपनी निजी गाड़ियों में घायलों को अस्पताल पहुँचा रहे थे या उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा रहे थे.
अस्पताल में बड़ी संख्या में घायलों के पहुँचने के कारण वहाँ ख़ून की कमी हो गई. अस्पताल के कर्मचारी बाहर निकल कर बार-बार लोगों से ख़ून देने की अपील करते नज़र आए.
अस्पताल के कर्मचारी ऊँची आवाज़ में अनुरोध करते नज़र आए - "घायलों के लिए ख़ून की सख़्त ज़रूरत है और अस्पताल में खून की कमी है. घायलों की जान बचाने के लिए आपका एक यूनिट खून भी काफ़ी मददगार साबित हो सकता है."
उनकी अपील का लोगों पर असर भी हुआ. लोग बड़ी संख्या में खून देने के लिए अस्पताल पहुँचे. घायलों को एसमएस अस्पताल के अलावा शहर के कुछ अन्य अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है. अस्पतालों में भर्ती घायलों में से अनेक की हालत नाज़ुक बनी हुई है.
अस्पताल में अपने परिचितों और रिश्तेदारों की तलाश में लोग रोते-बिलखते हुए पहुँच रहे थे. जिन्हें अपने परिजनों की ख़बर नहीं मिली, वे पूछताछ करते पाए गए.
हालात बिगड़ने नहीं चाहिए
बम धमाकों के बाद से शहर के लोग डरे हुए हैं. वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस शहर में लोग वर्षों से मिल-जुलकर रहते आए हैं वहाँ धमाके कैंसे हो सकते हैं. बार-बार लोग यही कहते पाए गए - 'ऐसे धमाकों के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था.'
मंगलवार का दिन होने के कारण धमाके के समय शहर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी हुई थी. लेकिन लोगों को जैसे ही धमाकों की ख़बर मिली, वे एक-दूसरे से इसकी पुष्टी करने लगे और अस्पताल पहुँचने लगे. लोग एक-दूसरे को समझा रहे थे कि 'धीरज रखना चाहिए, शहर के हालात बिगड़ने नहीं चाहिए.'