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रविवार, 11 मई, 2008 को 02:54 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

राजस्थान के खेतोलाई गाँव का दर्द

भारत के पोखरण में हुए परमाणु विस्फोट को रविवार को दस साल हो गए.

भारत ने राजस्थान के जैसलमेर ज़िले के पोखरण में 1998 में दो परमाणु परीक्षण किए थे.

मगर परीक्षण स्थल के सबसे नजदीकी गाँव खेतोलाई को मलाल है की उनके गाँव का नाम परीक्षण के साथ नही जोड़ा गया.

गाँव में पोखरण धमाकों की स्मृति पर किसी जलसे का भी आयोजन नहीं किया जा रहा है.

उधर जयपुर में मानवाधिकार संगठनों ने मानव श्रृंखला बना कर कहा कि हमें और परमाणु परीक्षण नहीं चाहिए.

नाथूराम विश्नोई कहते हैं, '' हमारा गाँव सिर्फ़ दो किलोमीटर है जहाँ धमाके हुए थे. मगर हमें पहचान नहीं दी गई.''

खेतोलाई उस समय सुर्खियों में आया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी विस्फोट के बाद पोखरण आए और खेतोलाई के लोग विरोध में खड़े हो गए.

नाथूराम की पत्नी मुली बाई इस गाँव की सरपंच रह चुकी है. लोग उन्हें सरपंच पति कहते है.

नाथूराम कहते हैं,'' हमें क्या मिला? गाँव में एक चिकित्सा उपकेंद्र है. मगर सुविधाएं नहीं है.''

विश्नोई बहुल इस गाँव में ढाई हज़ार से ज्यादा लोग रहते है.

खेतोलोई की खूबियाँ

गाँव के एक शिक्षक अशोक विश्नोई ने बीबीसी से कहा,'' लगभग पूरा गाँव साक्षर है. यहाँ लड़कियों के लिए माध्यमिक स्कूल है जहाँ 400 लड़कियाँ पढ़ती है.''

खेतोलाई के तेजराम एक और खूबी बयां करते है.

उनका कहना है,''जब चुनाव होता है तो लगभग 99 फ़ीसदी लोग मतदान करते है.''

अशोक विश्नोई कहते हैं,'' पहले ज्यादातर लोग कांग्रेस को वोट डालते थे. मगर पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का बंटवारा हुआ.''

गाँव के काफ़ी लोग सरकारी नौकरी में है. वैसे लोग खेती बाड़ी करते है और पशुपालन और दूसरे काम में भी लगे है.

नाथूराम बताते हैं,'' इस गाँव में गायों की संख्या छह हज़ार है तो ऊँटों की संख्या डेढ़ हज़ार है.''

उधर जयपुर मे पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ ने एक विरोध आयोजन कर कहा कि दुनिया को अब और परमाणु विस्फोट नहीं चाहिए.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ जयपुर में मानव श्रृंखला बनाई और कहा कि बस अब और विस्फोट नहीं.

मानवाधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव का कहना था, '' पूरी दुनिया को हथियार त्याग देने चाहिए. सबसे पहले भारत और पाकिस्तान को शुरुआत करनी चाहिए. हथियारों की होड़ ठीक नहीं है. इसी मुद्दे पर हमने जयपुर में जनजागरण का काम किया है.''

इन कार्यकर्ताओं ने कहा कि पूरी दुनिया को आज अमन की ज़रुरत है और संसाधनों को ग़रीबी से लड़ने में खर्च किया जाना चाहिए.

खेतोलाई एक ऐसा मकाम बन गया है जहाँ दुनिया भर के पत्रकार और शान्ति कार्यकर्ता फेरी लगा चुके है.

जापान में हिरोशिमा और हिरोशिमा त्रासदी में बचे दो लोग कुछ साल खेतोलाई का दौरा कर चुके है.

वे ये बताने आए थे कि परमाणु बम मानवता के लिए कितने ख़तरनाक हो सकते हैं.