रविवार, 11 मई, 2008 को 13:07 GMT तक के समाचार
अपनी पार्टी के अंदर से ही कड़ी आलोचना का सामना कर रहे वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि वे हमेशा गांधी परिवार के प्रति निष्ठावान बने रहेंगे.
उन्होंने अपने ऊपर आई पुस्तक 'मोहे कहाँ विश्राम' को लेकर चल रहे विवादों को बेकार और अनावश्यक बताया. अर्जुन सिंह ने कहा कि ये पुस्तक उनकी आत्मकथा नहीं है और वे अपनी आत्मकथा अभी लिख रहे हैं.
अर्जुन सिंह की जीवनी पर आई पुस्तक मोहे कहाँ विश्राम कन्हैयालाल नंदन ने लिखी है और दो दिन पहले ही इस पुस्तक का विमोचन हुआ है और इसे राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को भी दिया गया था.
कहा जा रहा है कि इस पुस्तक में अर्जुन सिंह ने कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली ख़ासकर फ़ैसला लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.
'निष्ठा का आकलन'
और तो और पुस्तक विमोचन के अवसर पर अर्जुन सिंह ने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी में निष्ठा का आकलन बहुत संकीर्ण संदर्भ में किया जा रहा है.
अर्जुन सिंह के इस बयान के कारण पार्टी के अंदर से ही उन्हें विरोध का सामना कर पड़ रहा है. रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके अर्जुन सिंह ने स्पष्टीकरण देने की कोशिश की है.
अर्जुन सिंह ने इस बयान में कहा है, "मैं जब मार्च 1960 में पंडित जवाहर लाल नेहरु से मिला था, तो मैंने उनके और उनके परिवार के प्रति निष्ठा का वादा किया था. वो मेरी प्रतिबद्धता थी. पिछले 48 वर्षों से मैं इसे निभा रहा हूँ. जब तक मैं जीवित हूँ मैं गांधी परिवार के साथ अपना वादा पूरा करता रहूँगा."
पुस्तक और फिर बयानों को लेकर चल रहे विवाद के बारे में अर्जुन सिंह ने कहा कि उनके लिए यह अध्याय ख़त्म हो चुका है. पिछले दिनों अर्जुन सिंह ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का सुझाव दिया था.
लेकिन पार्टी हाईकमान ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें फटकार भी लगाई. उस समय कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने एक तरह से इस मुहिम को 'चापलूसी' करार दिया था.