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शनिवार, 10 मई, 2008 को 16:52 GMT तक के समाचार

'अक़्लमंदी की आवाज़ सुनें'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि देश की जनता अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सलाह पर ध्यान देगी.

एक दिन पहले ही पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने कहा था कि भारत को इस परमाणु समझौते को लागू करना चाहिए क्योंकि इससे देश के परमाणु कार्यक्रम को मदद मिलेगी.

राष्ट्रपति भवन के एक समारोह में हिस्सा लेने गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पत्रकारों से कहा, "मुझे उम्मीद है कि देश की जनता समझदारी की आवाज़ को सुनेगी."

पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते की वकालत करते हुए कहा था कि इससे देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा.

कलाम ने कहा था, "हमें इस समझौते पर आगे बढ़ना चाहिए. किसी भी समय अगर हमें ऐसा लगेगा कि इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो रहा है तो हम कभी भी इससे अलग हो सकते हैं."

प्रशंसा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम की प्रशंसा की और कहा कि वे जाने-माने वैज्ञानिक थे और पोकरण परमाणु परीक्षण से बहुत क़रीब से जुड़े हुए थे.

क़रीब 10 साल पहले 11 और 13 मई 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. उस समय कलाम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख थे और उन्हीं के नेतृत्व में ये परीक्षण हुए थे.

बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते कलाम राष्ट्रपति चुने गए और पिछले साल ही वे इस पद से रिटायर हुए हैं. कलाम का मानना है कि पोखरण में परमाणु परीक्षण का फ़ैसला बिल्कुल सही था और ये उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ये बयान ऐसे समय आया है जब सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के रुख़ के कारण अमरीका के साथ परमाणु समझौता अधर में पड़ा हुआ है.

वामपंथी दल सरकार पर इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि वो मौजूदा स्थिति में परमाणु समझौते को आगे ना बढ़ाए.