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शनिवार, 10 मई, 2008 को 01:38 GMT तक के समाचार

अविनाश दत्त
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर से

कर्नाटक में लगभग 60 प्रतिशत मतदान

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 11 जिलों की 89 सीटों पर मतदान पूरा हो गया है. राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार मतदान शांतिपूर्ण रहा और लगभग 59.5 प्रतिशत वोट डाले गए.

कर्नाटक में चुनावी दंगल भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (सेक्युलर) और कांग्रेस के बीच है. शाम पाँच बजे मतदान ख़त्म होने के साथ ही 953 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद हो गया. इसमें 40 महिलाएँ भी हैं.

विभिन्न इलाक़ों से आ रही रिपोर्टों के जोड़ में लगे विशेष चुनाव अधिकारी आर मनोज ने बीबीसी को बताया, "कर्नाटक के ग्रामीण इलाक़ों में 64 प्रतिशत और शहरी इलाक़ों में 50 प्रतिशत मतदान हुआ है. मतदान शांतिपूर्ण रहा और कोई ख़ास अप्रिय घटना नहीं घटी है."

कर्नाटक के चुनाव अधिकारियों के अनुसार बंगलौर में फ़र्जी वोट डालने के आरोप में 15 लोगों की गिरफ़्तारी और मैसूर में हलके लाठीचार्ज के अलावा कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है.

छुट-पुट घटनाएँ

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह सात बजे मतदान शुरू हो गया था और दोपहर तक 34.5 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.

समाचार एजेंसियों के अनुसार मैसूर के कुछ इलाक़ों में 'हल्का लाठीचार्ज' किया गया. कुछ मतदान केंद्रों पर लोगों ने मतदाता सूची से अपना नाम काटे जाने के विरोध में हंगामा भी किया.

कर्नाटक में चुनाव आयोग ने शाम तीन बजे तक लगभग 45 प्रतिशत मतदान होने की ख़बर दी थी.

बंगलौर में चुनाव आयोग के विशेष अधिकारी आर मनोज ने बीबीसी को बताया, "बंगलौर के आरतीनगर इलाक़े में फ़र्ज़ी मतदान के आरोप में 15 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है."

उनका कहना था, "मैसूर में एक सरकारी अधिकारी के ख़िलाफ़ मतदान के दिन चुनाव प्रचार के आरोप लगे हैं. कुछ जगह पर इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के काम करने में दिक्कत आई जो बाद में सुलझा ली गई."

स्थायी सरकार का मसला

इस चरण में लगभग एक करोड़ 72 लाख से कुछ ज़्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते थे.

कर्नाटक में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं. दूसरे और तीसरे चरण का मतदान 16 और 22 मई को होगा. मतगणना 25 मई को होगी.

शांतिपूर्वक मतदान संपन्न कराने के लिए लगभग 60 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर रखा है.

मैसूर ज़िले में कांग्रेस जनाधार वापस लेने की कोशिश कर रही है. पिछले चुनाव में पार्टी ने यहाँ की 24 सीटों पर सफलता हासिल की थी.

लेकिन जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने 34 सीटों पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था. वोक्कालिंगा बहुल इस इलाक़े में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी अपना पाँव पसारने की कोशिश कर रही है.

राजधानी बंगलौर की 28 विधानसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में शहर की बुनियादी संरचना मुख्य मुद्दा है.

कांग्रेस और भाजपा राज्य में स्थायी सरकार देने का वादा कर जनता से वोट माँग रही है.

इन दोनों दलों के निशाने पर है जनता दल (एस). कांग्रेस और भाजपा का कहना है कि जिस तरह जेडीएस ने पिछले चुनाव के बाद गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया उसे देखते हुए इस पार्टी पर भरोसा करना ठीक नहीं होगा.

प्रमुख नेताओं के भाग्य का फ़ैसला

जेडीएस के पास कोई विशेष 'स्टार प्रचारक' भी नहीं बचा है. उसके नेता एमपी प्रकाश, जीटी देवगौड़ा, बीएन बच्चेगौड़ा और 58 विधायकों में से लगभग आधे ने पार्टी से किनारा कर लिया है.

इन नेताओं का आरोप है कि एचडी देवगौड़ा ने जेडीएस को पारिवारिक पार्टी बना कर रख दिया है. अधिकतर सीटों पर बहुकोणीय संघर्ष की संभावना है लेकिन कई सीटों पर कांग्रेस-भाजपा और कांग्रेस-जेडीएस के बीच सीधा मुक़ाबला है.

मांड्या और हासन में कांग्रेस-जेडीएस के बीच सीधा मुक़ाबला है जबकि भाजपा अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस को चुनौती देती नज़र आ रही है.

पहले चरण में जिन नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है उनमें एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे एचडी कुमारस्वामी और एचडी रेवन्ना शामिल हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी रामनगरम सीटे से पिछला चुनाव जीते थे लेकिन इस बार उनका मुक़ाबला रामकृष्ण हेगड़े की बेटी ममता निचानी से है.

भारतीय जनता पार्टी ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रुप में पेश किया है.