शुक्रवार, 09 मई, 2008 को 22:07 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की फाँसी की सज़ा माफ़ करने की वकालत की है.
उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सुझाव दिया है कि वे सरबजीत की फाँसी की सज़ा पर रोक लगा दें.
इससे पहले पाकिस्तान के मानवाधिकार मामले के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से कहा था कि उन्हें पाकिस्तान में मौत की सारी सज़ाओं को उम्रक़ैद में तब्दील करने पर विचार करना चाहिए.
उनका यह सुझाव भी सरबजीत की फाँसी की सज़ा माफ़ करने के संदर्भ में था.
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की फाँसी पर अगले आदेश तक के लिए रोक पहले ही लगा दी है. लेकिन अभी सज़ा माफ़ नहीं की गई है.
सुझाव
पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ने एक भारतीय टेलीविज़न चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सुझाव दिया है कि सरबजीत की फाँसी की सज़ा माफ़ कर देनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "सरबजीत की फाँसी की सज़ा पर गृहमंत्रालय, विदेश मंत्रालय, क़ानून और मानवाधिकार मंत्रालय को भी विचार करना चाहिए."
गिलानी ने यह भी कहा है कि सरबजीत की फाँसी पर पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय विचार कर रहा है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का यह सुझाव भारत की ओर से की गई अपील के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को सरबजीत की फाँसी की सज़ा माफ़ कर देनी चाहिए.
सरबजीत के परिजनों ने भी पाकिस्तान सरकार से ऐसी ही अपील की थी.
पिछले दिनों सरबजीत के परिजन उनसे मिलने पाकिस्तान गए थे.
इसके अलावा दोनों देशों के कई मानवाधिकार संगठन और नेता सरबजीत की फाँसी की सज़ा माफ़ करने की माँग करते आए हैं.
सरबजीत सिंह पर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे.
उन पर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई.
निचली अदालत की ये सज़ा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी.