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गुरुवार, 08 मई, 2008 को 07:01 GMT तक के समाचार

एम्स निदेशक को हटाना ग़लत: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स के निदेशक डॉक्टर पी वेणुगोपाल को हटाए जाने को अनुचित करार दिया है.

अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निदेशक की नियुक्ति संबंधी क़ानून में संशोधन को ख़ारिज कर दिया है.

इसी के आधार पर एम्स के निदेशक पद से डॉक्टर वेणुगोपाल को हटा दिया गया था.

इस फ़ैसले को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.

डॉक्टर वेणुगोपाल के वकील मनिंदर सिंह का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्वायत्त संस्थानों में हस्तक्षेप न किया जाए.

दरअसल एम्स के निदेशक पी वेणुगोपाल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस के बीच पिछले कुछ वक्त से खींचतान चल रही थी.

कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने एम्स के निदेशक की उम्र सीमा 65 साल निर्धारित करने संबंधी एक क़ानून बनाकर उसके आधार पर 66 वर्षीय वेणुगोपाल को उनके पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह टीडी डोगरा को कार्यकारी निदेशक नियुक्त कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर वेणुगोपाल को सरकार ने पाँच साल के लिए नियुक्त किया था और उनका कार्यकाल जुलाई, 2008 को समाप्त हो रहा है.

ख़ीचतान

इस नए क़ानून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से वेणुगोपाल को पद से हटाने के लिए उठाए गए क़दम के रुप में देखा गया था.

इस क़ानून के ख़िलाफ़ वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट चले गए थे.

पिछले दो सालों में निदेशक और मंत्री के बीच खींचतान में कई बार अदालतों को दखल देना पड़ा.

एम्स के डॉक्टरों का एक बड़ा समूह वेणुगोपाल का समर्थन करता है और सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ चिकित्सक कुछ समय के लिए हड़ताल पर भी चले गए थे.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने वेणुगोपाल की याचिका स्वीकार कर ली थी और इस मामले पर पिछले कुछ समय से सुनवाई चल रही थी.