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बुधवार, 07 मई, 2008 को 17:33 GMT तक के समाचार

हफ़ीज़ चाचड़
कराची, पाकिस्तान से

निर्मला देशपांडे की अस्थियाँ पाकिस्तान में

सुप्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता, चिंतक और लेखिका निर्मला देशपांडे की अस्थियाँ कराची लाई गई हैं और उनकी इच्छा के अनुसार इसे सिंधु नदी में विसर्जित किया जाएगा.

राज्यसभा की मनोनीत सदस्य निर्मला देशपांडे का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया था.

पाकिस्तान में सामाजिक कार्यकर्ता करामत अली और बीएम कुट्टी दिल्ली से उन की अस्थियाँ कराची लाए हैं.

निर्मला देशपांडे ने पाकिस्तान और भारत के संबंध बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई और पाकिस्तान में भी वह भारत की तरह 'दीदी' के नाम के मशहूर थीं.

कराची से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुलशने मेमार में निर्मला देशपांडे की अस्थियाँ रखी गई हैं. उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पाकिस्तान के विभिन्न शहरों से लोग आ रहे हैं.

करामत अली ने बीबीसी को बताया कि निर्मला देशपांडे की इच्छा थी कि उनकी अस्थियों को भारत समेत दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में भी विसर्जित किया जाए.

उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में शांति के लिए दीदी निर्मला का काफ़ी योगदान है और वे पूरे दक्षिण एशिया में शांति देखना चाहती थीं.”

दक्षिण एशिया में आपसी सदभावना क़ायम करने की दिशा में निर्मला देशपांडे ने महत्वपूर्ण कार्य किया है.

करामत अली का कहना था, “दीदी की अस्थियाँ उनके साथी नेपाल लेकर गए हैं, बांग्लादेश लेकर गए हैं और हम पाकिस्तान लेकर आए हैं.”

उन्होंने बताया कि अस्थियाँ सिंधु नदी में विसर्जित की जाएँगीं.

विनोबा भावे के साथ भूदान यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ अपना सामाजिक जीवन शुरु करने वाली निर्मला देशपांडे आजीवन गांधीवादी बनी रहीं और गांधी के विचारों का प्रचार प्रसार करती रहीं.

उन्होंने कई उपन्यास, नाटक और यात्रावृत्तांत भी लिखे हैं.