बुधवार, 07 मई, 2008 को 07:01 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
भारत ने बंगाल की खाड़ी में एक द्वीप से ज़मीन से ज़मीन पर मार करने में सक्षम अपनी सबसे लंबी दूरी की मिसाइल अग्नि-III का सफल परीक्षण किया है.
बीजिंग और शंघाई जैसे चीनी शहरों के अलावा हिंद महासागर में अमरीकी सैन्य ठिकाने इसकी जद में आते हैं.
सेना के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन रमेश कुमार दास ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण 'व्हीलर्स आइलैंड' से किया गया है.
डेढ़ टन तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की ये मिसाइल तीन हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा दूर तक मार कर सकती है.
बुधवार को हुआ ये परीक्षण इस मिसाइल का तीसरा परीक्षण है.
सबसे पहले अग्नि-III का परीक्षण वर्ष 2006 में किया गया था लेकिन उस समय इसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी.
उस दौरान ये मिसाइल लक्ष्य को भेदने से पहले ही समुद्र में गिर गई थी.
पिछले साल 12 अप्रैल को इसका दूसरा परीक्षण किया गया था जो सफल साबित हुआ था.
रणनीतिक महत्व
इस मिसाइल की तैनाती के बाद भारत की मारक क्षमता को मज़बूती मिलेगी क्योंकि इसे कहीं से भी एक चलायमान प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है.
सेना के प्रवक्ता का कहना था कि सेना में शामिल करने से पहले इस मिसाइल के कुछ और परीक्षण किए जाएँगे.
भारत के लिए रणनीतिक रूप से अग्नि-III का क्या महत्व है, इस बात का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि बीजिंग और शंघाई जैसे चीनी शहर इसकी जद में होंगे.
हिंद महासागर में डियेगो गार्सिया का अमरीकी सैन्य ठिकाना भी इस मिसाइल की पहुँच से बाहर नहीं होगा.
उन्होंने बताया कि 16 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन 48 टन के आसपास है और यह तीन हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा दूर तक अपने लक्ष्य को निशाना बना सकती है.
अग्नि-II को सेना में शामिल किया जा चुका है और ये दो हज़ार किलोमीटर तक मार कर सकती है. अग्नि-I की मारक क्षमता 750 किलोमीटर है.
प्रवक्ता का कहना था कि अग्नि मिसाइलों का विकास परमाणु प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
उनका कहना है कि अग्नि मिसाइल परिवार की मारक क्षमता और परमाणु हथियार ले जाने की उसकी क्षमता का आगे और विस्तार किया जाएगा.