मंगलवार, 06 मई, 2008 को 04:35 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की मुख्य पार्टियों ने चुनाव आयोग के उस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है जिसमें आयोग ने उपचुनाव की तारीख़ आगे बढ़ा दी है.
आयोग का कहना है कि उपचुनाव की तारीख़ पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम इलाकों में कानून व्यवस्था को लेकर उपजी चिंताओं की वजह से आगे बढ़ाई गई हैं.
इस उपचुनाव में राष्ट्रीय एसेंबली की आठ सीटों औऱ प्रांतीय एसेंबली की 32 सीटों के लिए चुनाव होने थे.
इससे पहले उपचुनाव को एक बार टाला जा चुका है. ये उपचुनाव 18 जून को होने थे. अब उपचुनाव की नई तारीख़ 18 अगस्त निर्धारित की गई है.
याद रहे कि आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़, दोनों ही फ़रवरी में होने वाले चुनाव में खड़े नहीं हुए थे.
रिपोर्टों का कहना है कि दोनों नेता इस उपचुनाव में चुनाव लड़ने की सोच रहे थे.
चुनाव आयोग के सदस्य राष्ट्रपति चुनते हैं. लेकिन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के प्रवक्ता ने किसी राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार किया है और कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.
'लोकतंत्र के विरुद्ध'
आसिफ़ अली ज़रदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सदस्यों का कहना है कि इस फ़ैसले के पूर्व उनसे कोई सलाह नहीं ली गई.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता शेरी रहमान ने चुनाव आयोग के इस फ़ैसले की निंदा की और इसे लोकतंत्र विरोधी कदम बताया.
उधर आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा कि अग़र पाकिस्तान के किसी इल़ाके में कानून व्यवस्था की स्थिति बुरी थी, उसकी वजह से पूरे देश में आम चुनाव की तारीख़ आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है.
प्रेक्षकों का कहना है कि जब से चरमपंथियों ने युद्धविराम की घोषणा की है, तब से पाकिस्तान में अपेक्षाकृत शांति है.
चुनाव आयोग के सचिव ने कहा है कि सूबा सरहद के इलाकों में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से उन्हें चिंता है.
उनका कहना था कि चुनाव के लिए जून का महीना सही नहीं है क्योंकि इस वक्त है राष्ट्रीय और प्रांतीय एसेंबलियाँ बजट से जूझ रही होती हैं.