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रविवार, 04 मई, 2008 को 04:26 GMT तक के समाचार

अविनाश दत्त
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर से

फिर त्रिशंकु विधानसभा की संभावना

कर्नाटक में चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए मात्र छह दिन बचे हैं. राज्य में भाजपा, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर), तीनो ही पार्टियों पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं.

हर दल ने दावा किया है कि अगर उनकी पार्टी अकेले सरकार नहीं बना पाई तो विपक्ष में बैठेगी.

शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्ण अडवानी ने पार्टी को बहुमत मिलने की बात कही थी.

लालकृष्ण अडवानी ने स्पष्ट संकेत दिए कि भाजपा जनता दल (सेक्युलर)से कोई गठबंधन नही करेगी.

इसका अर्थ यह कि अग़र भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला तो वह छोटे दलों जैसे जनता दल (युनाईटेड) और निर्दलियों के साथ सम्भावनायें तलाशेगी या फिर विपक्ष में बै1ठेगी.

सहमति का अभाव

बिहार में भाजपा और जनता दल (युनाईटेड) की साझा सरकार भले ही चल रही हो पर कर्नाटक में दोनों दल सहमति के अभाव में अलग अलग चुनाव लड़ रहे हैं.

बीबीसी से बात करते हुए जनता दल (सेक्युलर) महासचिव दानिश अली ने दावा किया कि उनका दल पूर्ण बहुमत ले कर सत्ता में आएगा.

दानिश अली कहते हैं कि अगर बहुमत में कोई कसर रह जाएगी तो निर्दलियों और छोटे दलों का सहारा लिया जाएगा.

दानिश अली ये भी कहते हैं कि भाजपा या कांग्रेस से हाथ मिलाने की बजाय उनका दल विपक्ष में बैठेगा.

उधर बंगलौर से छपने वाले एशियन एज अखबार के ब्यूरो प्रमुख भास्कर हेगडे़ खिचड़ी विधानसभा की संभावनाओं से इंकार नहीं करते.

हेगडे़ कहते हैं निजी बातचीत में विभिन्न दलों के नेता भी खिचड़ी विधानसभा की संभावना व्यक्त कर रहे हैं.

पिछले अप्रैल 9 को जनता दल (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने एक कार्यक्रम में कांग्रेस और भाजपा को चुनौती दे डाली थी की बिना उनकी पार्टी के वह अगली सरकार बना कर दिखायें.

हालांकि दो दिन बाद एक अखबार को दिए साक्षात्कार में देवगौड़ा अपने बात से पलट गए और कहा कि राज्य में अगली सरकार एक ही दल की होगी.