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शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 09:59 GMT तक के समाचार

अमरीका का माओवादियों से संपर्क

अमरीका ने पहली बार नेपाल के माओवादियों के साथ सीधा कूटनीतिक संपर्क साधा है.

नेपाल में माओवादियों ने हाल में 601 में से 220 सीटें जीतकर संविधान सभा के चुनाव में जीत पाई थी.

हालाँकि माओवादियों को मिली सीटें स्पष्ट बहुमत से कम हैं लेकिन उनके नेता पुष्प कमल दहाल उर्फ़ प्रचंड के नेतृत्व वाले नेपाली माओवादी अब नेपाल की नई सरकार में मुख्य भूमिका में हैं.

नेपाल में अमरीकी राजदूत नैन्सी पॉवल ने माओवादी नेता प्रचंड से गुरुवार को मुलाकात की थी.

अमरीकी दूतावास के एक बयान के मुताबिक बैठक का मुख्य मुद्दा देश में हुए चनावों के परिणाम थे.

अनेक पर्यवेक्षक इस बैठक को अमरीकी कूटनीति में मील के पत्थर की तरह देख रहे हैं क्योंकि अमरीका में नेपाली माओवादी अब भी 'आतंकवादी संगठनों की सूची' में शामिल हैं.

नेपाल में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बैठक से ये पता चलता है कि नेपाल में माओवादियों की ओर अमरीकी नीति पर पुनर्विचार हो रहा है.

काठमांडु में अमरीकी दूतावास के एक वक्तव्य में कहा गया है कि नैन्सी पॉवेल अमरीका-नेपाल संबंधों पर आगे विचार करने के लिए जल्दी ही वाशिंगटन का दौरा करेंगी.

वक्तव्य में कहा गया है कि नैन्सी पॉवेल ने प्रचंड को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया कि माओवादी विद्रोही राजनीतिक प्रक्रिया को अपनी कथनी और करनी के ज़रिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाएँ.

माओवादी नेपाल में राजतंत्र को समाप्त करने के मुद्दे पर राजनीतिक प्रक्रिया में काम कर रहे हैं और राजा ज्ञानेंद्र से स्वेच्छा से पद छोड़ने का आग्रह भी किया गया है.

प्रचंड कह चुके हैं कि वह नेपाल के राष्ट्रपति पद पर बैठना चाहते हैं. नेपाली माओवादियों को अब एक गठबंधन अंतरिम प्रशासन बनाकर देश के लिए नया संविधान तैयार करना है.

शर्मिंदगी

अमरीका ने पिछले साल से नेपाल की अंतरिम सरकार के साथ संबंध बनाते समय माओवादी विद्रोहियों को नज़रअंदाज़ किया, हालाँकि माओवादी विद्रोही उस सरकार का भी हिस्सा थे.

10 अप्रैल को हुए चुनावों के तुरंत बाद पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने बीबीसी से कहा था कि अमरीका माओवादी विद्रोहियों से जो संबंध नहीं बना पा रहा है, उनकी नज़र में, वह एक नाकामी है और शर्मिंदगी वाली बात है.

नेपाल में लगभग दस साल से अशांति थी जिस दौरान माओवादी विद्रोहियों और सरकार के बीच लड़ाई चल रही थी. इस लड़ाई में हज़ारों लोग मारे गए हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि माओवादियों के सामने अब बहुत सी समस्याएँ और चुनौतियाँ हैं क्योंकि मुख्य धारा के अन्य राजनीतिक दल उन पर विश्वास नहीं करते हैं.

चुनावों के बाद प्रचंड ने वादा किया है कि माओवादी देश में बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण राजनीति के लिए संकल्पबद्ध हैं.

हालाँकि माओवादियों की पार्टी की युवा शाका के कुछ सदस्यों पर प्रताड़ना और फिरौती वसूलने के भी आरोप लगे हैं.

नेपाल की सेना इस प्रस्ताव का भी विरोध कर रही है कि कूछ पूर्व माओवादी लड़ाकों को सेना में भर्ती किया जाए.