शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 07:47 GMT तक के समाचार
भारतीय जनता पार्टी की शुक्रवार को महँगाई के मुद्दे पर बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का कई राज्यों में असर दिखाई दिया. असम, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल, मणिपुर और कुछ अन्य राज्यों में हड़ताल से जनजीवन पर काफ़ी असर पड़ा.
ग़ौरतलब है कि ताज़ा आंकड़ों के अनुसार महँगाई 7.57 प्रतिशत हो गई है और ये पिछले 42 महीने में सबसे ऊँचे स्तर पर है.
अनेक जगह बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे लेकिन अधिकतर जगह यातायात और अन्य आवश्यक सेवाओं पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा क्योंकि भाजपा ने घोषणा की थी कि इन्हें हड़ताल के दायरे से बाहर रखा गया है.
भाजपा ने स्पष्ट कहा है कि इस दौरान परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं में बाधा नहीं डाली जाएगी.
भाजपा कार्यकर्ता कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन करते नज़र आए और मानव श्रृंखला बनाकर भी विरोध दर्ज किया गया. ये हड़ताल केवल भाजपा की ही थी और इसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल शामिल नहीं थे.
अनेक राज्यों में असर
समाचार एजेंसियों के अनुसार केरल में दो पहिया वाहनों और कुछ निजी वाहनों को छोड़ सार्वजनिक यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ. केरल में सरकारी दफ़्तरों में भी कम ही लोग पहुँचे.
मणिपुर में भी हड़ताल का ख़ासा असर हुआ और अधिकतर दुकानें, बाज़ार और व्यवसायिक संस्थान बंद रहे. लेकिन वहाँ से विभिन्न राज्यों को होने वाले यातायात पर असर नहीं पड़ा है.
जम्मू में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला. दुकानें और व्यवसायिक संस्थान जम्मू शहर में बंद रहे लेकिन यातायात में कोई बाधा नहीं आई. सरकारी कर्मचारी भी दफ़्तरों और बैंकों में पहुँचे.
हिमाचल में भाजपा समर्थिक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. राजधानी शिमला में बाज़ार बंद रहे और कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों के दफ़्तरों के बाहर धरना प्रदर्शन किया.
असम में भी हड़ाताल का व्यापक असर दिखा और कई जगह प्रदर्शन और धरने हुए.
भाजपा की हिदायत
हड़ताल की शुरुआत से पहले भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने पत्रकारों से कहा था, "एनडीए के सभी सांसदों ने संसद में मिलकर मानव श्रृँखला बनाई थी और वे इस मुद्दे पर एक साथ हैं. लेकिन देशव्यापी हड़ताल एनडीए का कार्यक्रम नहीं है."
उनका कहना था कि ये हड़ताल जनता के लिए है, इसलिए पार्टी नहीं चाहती की जनता को कोई परेशानी हो. जावड़ेकर ने स्पष्ट किया था कि हड़ताल के दौरान केवल व्यापारिक प्रतिष्ठान व दुकानें ही बंद रहेंगी.
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आम आदमी को राशन दुकान से सस्ती दर में राशन मुहैया कराया जाए, साथ ही पेट्रोल और डीजल पर कर कम किए जाएं.
ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है.
हालांकि इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा और वामपंथी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि विपक्ष महँगाई की आड़ में आम लोगों की परेशानियों पर राजनीति न करे.