गुरुवार, 01 मई, 2008 को 04:19 GMT तक के समाचार
सुप्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता, चिंतक, लेखिका और राज्यसभा की सदस्य निर्मला देशपांडे का गुरुवार की सुबह दिल्ली में निधन हो गया है.
पद्म विभूषण से सम्मानित निर्मला देशपांडे 79 वर्ष की थीं.
निर्मला देशपांडे एक सहयोगी रवि ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने सुबह पाँच बजे अंतिम साँसें लीं.
वे पिछले तीन दिनों से अस्वस्थ थीं.
23 वर्ष की उम्र में ही वे विनोबा भावे के साथ भूदान आंदोलन में जुड़ गई थीं और उनके साथ देश भर में 40 हज़ार किलोमीटर की भूदान पदयात्रा की थी.
आजीवन उन्होंने शांति और अहिंसा के सिद्धांत का प्रचार किया और दक्षिण एशिया में आपसी सद्भावना क़ायम करने की दिशा में उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया.
भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों में कड़ुवाहट कम करने में उनकी अहम भूमिका रही है.
अनेक पुस्तकों की लेखिका निर्मला देशपांडे ने उपन्यास, नाटक और यात्रावृत्तांत लिखे हैं. इसके अलावा उन्होंने इशा उपनिषद का भाष्य भी लिखा है.
उन्हें तीन विश्वविद्यालयों में डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी थी.
पहले 1997 में और फिर 2004 में दूसरी बार उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया.
वे अविवाहित थीं.
श्रद्धांजली
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निर्मला देशपांडे को श्रद्धांजली देते हुए कहा कि वे चाहती थीं कि समाज महात्मा गाँधी के आदर्शों पर चले.
निर्मला देशपांडे को जनता का नेता करार देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा उड़ीसा में ग्राहम स्टेंस की हत्या के बाद उन्होंने सदभावना यात्रा का आयोजन किया और इलाके में शांति स्थापित करने के लिए सराहनीय प्रयास किये.
उधर काँग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने अपने संदेश में निर्मला देशपांडे को ग़रीबों और पिछड़ों के लिए काम करने वाला व्यक्ति बताया
जिन्होंने सामाजिक न्याय, धर्मनिर्पेक्षता और सांप्रदायिक सदभाव के लिए काम किया.