बुधवार, 30 अप्रैल, 2008 को 19:10 GMT तक के समाचार
सलाहकारों का कहना है कि निलंबित जजों की बहाली के मुद्दे पर पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन नेताओं की दुबई में हुई बातचीत के दौरान काफ़ी प्रगति हुई है.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ के नेता चौधरी निसार अली ख़ान का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच अधिकतर मुद्दों पर सहमति हो गई है, केवल कुछ क़ानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर मतभेद बाक़ी रह गए हैं.
उन्होंने बताया कि बातचीत गुरुवार को जारी रहेगी.
हाल के संसदीय चुनावों में जीत के बाद दोनों दल इस बात पर सहमत हुए थे कि अप्रैल के अंत तक निलंबित जजों को बहाल कर दिया जाएगा.
विश्लेषकों का कहना है कि इस मुद्दे पर यदि मतभेद नहीं सुलझे तो एक महीने पुरानी गठबंधन सरकार पर संकट उत्पन्न हो सकता है.
ये बातचीत बुधवार को दुबई के उस होटल में हुई जिसमें आसिफ़ अली ज़रदारी और उनकी पत्नी दिवंगत बेनज़ीर भुट्टो वर्षों तक रहे थे.
ये बातचीत लगभग सात घंटे तक चली और उसके बाद चौधरी निसार ख़ान ने पत्रकारों को बताया कि दोनों नेता गुरुवार को फिर बातचीत करेंगे.
उनका कहना था,'' इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय कल (गुरुवार) लिया जाएगा.''
निलंबन
दुबई रवाना होने से पहले नवाज़ शरीफ़ ने कहा था कि वो चाहते हैं कि गठबंधन सरकार चले. लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि जजों को बहाल नहीं किया गया तो ये पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा.
दूसरी ओर मंगलवार को पीपीपी नेता और पाकिस्तान की सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा था कि जजों की बहाली के लिए क़ानून की ज़रूरत होगी और इसमें थोड़ा समय लग सकता है.
ग़ौरतलब है कि पिछले साल राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी के दौरान क़रीब 60 जजों को निलंबित कर दिया था.
इनमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल थे.
इन जजों का निलंबन ख़ासा विवादित रहा था और इसके विरोध में धरने प्रदर्शन भी हुए थे.
नवाज़ शरीफ़ का कहना है कि गठबंधन सरकार को अपना वादा निभाना चाहिए और जजों की बहाली तय समयसीमा में हो जानी चाहिए.
पर दोनों ही दल अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुँचे हैं कि जजों की बहाली कैसे की जाए.