मंगलवार, 22 अप्रैल, 2008 को 13:24 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि सुलह समझौता होने के बाद देश के एक प्रमुख चरमपंथी मौलाना सूफ़ी मोहम्मद को रिहा कर दिया गया है.
मौलाना सूफ़ी मोहम्मद को अफ़ग़ानिस्तान से लौटने के बाद नवंबर 2001 में पाकिस्तान से गिरफ़्तार कर लिया गया था.
मौलाना सूफ़ी मोहम्मद पर आरोप है कि उन्होंने हज़ारों क़बायलियों को अफ़ग़ानिस्तान में घुसा दिया था ताकि वे अमरीका के नेतृत्व वाली सेना का मुक़ाबला करने के लिए तालेबान की मदद कर सकें.
पहले उन्हें पेशावर में पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के लिए अस्पताल से ले जाया गया जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.
पाकिस्तान की नई सरकार ने कहा है कि वह ऐसे किसी भी चरमपंथी से समझौते के लिए तैयार है जो मैत्री के लिए सहमत हो.
शांति स्थापना
मौलाना सूफ़ी मोहम्मद को प्रांत सरकार के साथ उस छह सूत्रीय शांति समझौते के बाद रिहा किया गया जिस पर उनकी तहरीक़ निफ़ाज़-ए-शरीयत मोहम्मदी मूवमेंट (टीएनएसएम) के आठ नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे.
यह समझौता स्वात ज़िले में शांति स्थापित करने के साथ सरकार के आदेश के पालन का वायदा करता है जहाँ काफ़ी समय से चरमपंथियों के साथ सेना की लड़ाई चल रही है.
समझौते के एक खंड में टीएनएसएम ने यह घोषणा की है कि पुलिसकर्मियों, सेना या सरकारी कर्मचारियों की हत्या ग़ैर-इस्लाम कृत्य है.
स्वात में लड़ रहे चरमपंथियों का नेतृत्व मौलाना फ़ज़लुल्लाह करते हैं जो मौलाना सूफ़ी मोहम्मद के नज़दीकी रिश्तेदार हैं.
संवाददाता का कहना है कि यह रिहाई समझौता मौलाना फ़ज़लुल्लाह के समर्थन को नुक़सान पहुँचा सकता है जो काफ़ी हद तक मौलाना सूफ़ी मोहम्मद के अनुयायियों पर निर्भर हैं.