संदीप साहू
भुवनेश्वर से
उड़ीसा में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है.
राज्य के कई इलाक़ों में तापमान अभी से 40 डिग्री से ऊपर चला गया है जिसके कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
मौसम विभाग के स्थानीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को औद्योगिक शहर तालचर में तापमान लगभग 45 डिग्री तक जा पहुँचा.
पश्चिमी शहर झारसुगुड़ा में सर्वाधिक तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस था जबकि क्योंझर में अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रहा.
राजधानी भुवनेश्वर में तापमान पिछले हफ़्ते 40 डिग्री से ऊपर चले जाने के बाद अब कुछ कम ज़रूर हुआ है.
लेकिन 90 फ़ीसदी उमस के कारण यहाँ सुबह 11 बजे के बाद बाहर निकलना मुश्किल हो गया है.
राज्य के विभिन्न इलाक़ों से अभी तक लू के कारण 17 लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है. लेकिन राज्य राज्य सरकार ने अभी तक इनमें से किसी की पुष्टि नहीं की है.
दस साल बाद...
राजस्व विभाग नियंत्रण कक्ष के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि जाँच के बाद पता चला है कि इन 17 मौतों में 13 लू से नहीं बल्कि दूसरे कारणों से हुई है.
बाक़ी चार मौतों के बारे में अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार किया जा रहा है.
सरकार भले ही मौतों की बात स्वीकार न करे लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में इस वर्ष ठीक उसी तरह की स्थिति है जैसी वर्ष 1998 में थी.
स्वतंत्र आंकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 1998 में राज्य में लू के कारण दो हज़ार से भी अधिक लोग मारे गए थे.
उड़ीसा कृषि एवं तकनीक विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के प्रोफ़ेसर सुरेंद्र नाथ पशुपालक के अनुसार राज्य में यह अस्वाभाविक तापमान पश्चिमी हवाओं के कारण नहीं बल्कि स्थानीय कारणों से हुआ है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम से बह रही हवा जैसे-जैसे गर्म होती जाएगी, उड़ीसा में तापमान वैसे-वैसे बढ़ता जाएगा.
प्रोफेसर सुरेंद्र नाथ का मानना है कि औद्योगिकीकरण, खनिजों की खुदाई, भारी संख्या में ताप बिजली परियोजनाएं और शहरीकरण के कारण राज्य में औसत तापमान लगातार ऊपर जा रहा है.