रविवार, 20 अप्रैल, 2008 को 23:29 GMT तक के समाचार
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव गोपीनाथ मुंडे ने पार्टी के सभी महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है.
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी ने उन्हें जो भी पद सौंप रखे हैं, उनसे उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है और अब वो एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी की सेवा करेंगे.
बताया जा रहा है कि गोपीनाथ मुंडे भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई में किए गए बदलावों से नाखुश हैं और इसीलिए उन्होंने यह क़दम उठाया है.
गोपीनाथ मुंडे राज्य कार्यकारिणी में एक प्रमुख नेता के तौर पर उभरे नितिन गडकरी के सहयोगी मधु चह्वाण को अध्यक्ष पद दिए जाने से ख़फ़ा हैं.
उन्होंने इस्तीफ़ा देते हुए कहा कि कई कारणों से वो इस्तीफ़ा दे रहे हैं. हालांकि इन कारणों की चर्चा उन्होंने नहीं की और कहा कि आगे इसके बारे में बताएंगे पर माना जा रहा है कि पार्टी कार्यकारिणी में राज्य स्तर पर हुआ फेरबदल उन्हें रास नहीं आया है.
जनाधार की धार
गोपीनाथ अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं और ओबीसी आरक्षण को लेकर जो स्थितियां देश में बनी हैं, उसके बाद पार्टी उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहती हैं.
शायद यही कारण है कि पार्टी आलाकमान की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई है.
कुछ पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने बताया कि पार्टी कार्यालय को या पार्टी अध्यक्ष को अभी उनकी ओर से कोई इस्तीफ़ा नहीं मिला है. अगर ऐसा है कि तो पार्टी उसपर विचार करेगी.
जेटली ने पार्टी के रुख़ का संकेत देते हुए कहा कि उनके इस्तीफ़े को स्वीकार करने का फिलहाल प्रश्न ही नहीं उठता है.
ज़ाहिर है कि गोपीनाथ मुंडे पार्टी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन के रिश्तेदार तो हैं ही, कई राज्यस्तरीय मुद्दों पर भी पार्टी में उनकी भूमिका काफ़ी अहम रही है.
पर ऐसा लगता है कि पार्टी की राज्य इकाई में जो बदलाव किए गए हैं उनमें गोपीनाथ मंडे को या तो पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है और या फिर वो उनसे संतुष्ट नहीं हैं.