शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2008 को 12:45 GMT तक के समाचार
भारत के विदेशमंत्री ने पाकिस्तान की सरकार से भारतीय क़ैदी सरबजीत सिंह के मामले में नरमी बरतने की अपील की है.
शुक्रवार को जारी एक बयान में विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि मानवीय आधार पर वो सरबजीत सिंह को राहत दे.
सरबजीत सिंह पिछले 17 बरसों से पाकिस्तान की जेलों में सज़ा काट रहे हैं.
दरअसल, सरबजीत सिंह पर 1990 में लाहौर में तीन बम धमाकों में शामिल होने और भारत के लिए जासूसी करने के आरोप हैं जिनके लिए उसे पाकिस्तान में फाँसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है.
अपने को बेगुनाह बताते हुए सरबजीत सिंह ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में अपील भी दायर की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फाँसी के फ़ैसले को बरक़रार रखा था.
इसके बाद से सरबजीत के परिवार ने पाकिस्तान की सरकार और भारत सरकार से कई बार अपील की कि सरबजीत निर्दोष हैं और उन्हें छोड़ दिया जाए.
अब इस दिशा में पहल करते हुए भारत सरकार ने भी पाकिस्तान की सरकार से सरबजीत को राहत दिए जाने की बात कही है.
हालांकि पिछले दिनों भारत दौरे पर आए पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने कहा था कि सरबजीत की रिहाई और बेगुनाही को साबित करने के लिए जितने सबूत उनके परिवार के लोग दिखा रहे हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं.
राहत की आस
बर्नी ने सरबजीत को राहत के कोई संकेत तो नहीं दिए थे पर इतना ज़रूर कहा था कि अगर सरबजीत के मामले में ज़रा भी गुंजाइश दिखाई देती है और उसपर लगे आरोपों में कहीं कोई भी कमी बाक़ी रहती है तो उसे रिहाई मिल सकती है.
बर्नी ने भारत यात्रा के दौरान सरबजीत के परिजनों को पाकिस्तान आने और सरबजीत से मिलने के लिए आवेदन करने को भी कहा था.
अब परिवार के सदस्यों को सरबजीत से मुलाक़ात के लिए पाकिस्तान जाने की अनुमति मिल चुकी है और वे पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे हैं.
ऐसे में भारत सरकार की ओर से की गई यह अपील सरबजीत को राहत दिलाने की दिशा में कारगर साबित हो सकती है.
राहत की आस इसलिए भी बनती नज़र आती है क्योंकि अंसार बर्नी ने इस मामले में यह भी कहा था कि सरबजीत की मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में बदलने की कोशिश की जाएगी क्योंकि सरबजीत ने जितने बरस फाँसी का इंतज़ार किया है, उतनी मियाद में उम्रक़ैद पूरी हो जाती है.
उन्होंने कहा था कि अगर वो एक सज़ा भुगत चुका है तो उसी गुनाह की दो सज़ा क्यों दी जाए. उन लोगों को दोनों ओर से रिहा किया जाना चाहिए जो लंबे समय से एक सज़ा के इंतज़ार में कई सज़ा भुगत चुके हैं.
पिछले दिनों भारत के एक अन्य क़ैदी कश्मीर सिंह को पाकिस्तान की जेलों से 35 बरस बाद रिहाई मिली थी. पर इसके बाद अपने एक बयान में कश्मीर सिंह ने स्वीकारा था कि वो पाकिस्तान में भारत के जासूस थे.
इस बयान के बाद क़ैदियों को छोड़ने के क़दम की आलोचना हुई थी और इसका असर सरबजीत की रिहाई पर पड़ता नज़र आ रहा था.