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शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2008 को 14:29 GMT तक के समाचार

'क्रीमी लेयर को आरक्षण का लाभ नहीं'

सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और आर्थिक रूप से मज़बूत तबके को 27 फ़ीसदी आरक्षण के दायरे से बाहर रखने का फ़ैसला लिया है.

विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को इस बारे में बताते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के संदर्भ में जो भी सुझाया है, हम उसे लागू करने की कोशिश करेंगे.”

उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार का विचार पूरी तरह स्पष्ट है. सरकार उच्च शिक्षा के लिए अवसरों और नौकरी में आरक्षण के बीच अंतर को साफ़ करना चाहती है.

विदेशमंत्री राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में गुरुवार की शाम इस बारे में लिए गए निर्णय से अवगत करा रहे थे.

क्रीमी लेयर बाहर

प्रणव मुखर्जी ने कहा, “क्रीमी लेयर की अवधारणा नौकरियों में आरक्षण से ताल्लुक रखती थी. 93वाँ संशोधन के मुताबिक शिक्षा में आरक्षण ओबीसी के लिए खुला था जिनमें क्रीमी लेयर भी शामिल थी.”

पिछले सप्ताह की सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा था कि आईआईटी, आईआईएम और अन्य केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण निर्धारित करने वाला क़ानून वैध है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादास्पद रहे क़ानून को लागू करते समय इसके दायरे से क्रीमी लेयर को बाहर रखने का निर्देश दिया था.

इसके बाद अब सरकार ने अपना मन स्पष्ट करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही वो ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करेंगे.

अब इस फ़ैसले से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भारतीय प्रबंधन संस्थानों समेत उच्च शिक्षण संस्थानों को ज़रूरी निर्देश जारी करने में मदद मिलेगी.

आरक्षण के मुद्दे पर ताज़ा फ़ैसले के अभाव में आईआईएम और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों ने दाख़िले की प्रक्रिया को स्थगित करने का फ़ैसला लिया था.