रविवार, 13 अप्रैल, 2008 को 16:37 GMT तक के समाचार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग ढाई साल बाद मंत्रिपरिषद में व्यापक फेरबदल किया है. पुराने दस मंत्रियों को हटा कर 19 नए मंत्री बनाए गए हैं.
मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों को राज्यपाल आरएस गवई ने राजभवन में आयोजित सादे समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
मंत्रिपरिषद विस्तार से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को छोड़कर सभी मंत्रियों का इस्तीफ़ा ले लिया.
नए मंत्रिपरिषद में 17 कैबिनेट और दो राज्यमंत्री होंगे. जिन लोगों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली वे हैं, नागमणि, जीतन राम मांझी, शाहिद अली ख़ान, दिनेश यादव, छेदी पासवान, दामोदर राउत, रामानंद प्रसाद सिंह, हरिनारायण सिंह, हरि प्रसाद साह, भगवान सिंह कुशवाहा, दिनेश प्रसाद , अवधेश नारायण सिंह, गिरिराज सिंह, रामनारायण मंडल, रेणु देवी, भोला प्रसाद सिंह और रामप्रवेश राय.
राज्यमंत्री के रूप में जमशेद अशरफ़ और व्यास देव प्रसाद ने शपथ ली.
जिन दस मंत्रियों को हटाया गया है वे हैं, भाजपा के कोटे से चंद्रमोहन राय और जर्नादन सिंह सिग्रीवाल और जद(यू) कोटे से भवन निर्माण मंत्री मोनाजिर हसन, समाज कल्याण मंत्री रामेश्वर पासवान, ग्रामीण विकास मंत्री वैद्यनाथ प्रसाद महतो, सूचना और जनसंपर्क राज्य मंत्री अर्जुन राय, लघु सिंचाई मंत्री विश्वमोहन कुमार, परिवहन मंत्री अजीत कुमार, अल्पसंख्यक विकास मंत्री मंजर आलम और खाद्य तथा उपभोक्ता मामलों की मंत्री सुचित्रा सिन्हा.
पर्यवेक्षकों की राय में अपने कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल कर नीतीश कुमार ने विधायकों में असंतोष को दबाने की कोशिश की है.
दरअसल नए क़ानून के तहत मंत्रिपरिषद की संख्या सीमित रखने के कारण मुख्यमंत्री के हाथ बंधे हुए थे और इस तरह की माँगें की जा रहीं थी कि अब मंत्रिपरिषद में नए लोगों की जगह दी जाए.
वर्ष 2005 में हुए चुनाव में जद (यू) और भाजपा गठबंधन ने जीत हासिल की थी जिसके बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे.