मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 23:24 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में लड़कियों की कम होती संख्या ने शादी के इच्छुक लड़कों के सामने संकट खड़ा कर दिया है.
अब कुंवारे युवक दुल्हन की तलाश में दूसरे धर्म का रुख़ करने लगे है.
राज्य के शेखावटी अंचल में एक युवक ने शादी के बाद अपना धर्म बदला तो उसे जाति पंचायत ने समाज से बाहर कर दिया.
सीकर जिले के चैनपुर गाँव के कालूराम की महाराष्ट्र में शादी हुई तो खूब जश्न का माहौल था.
मगर कालूराम जब अपनी दुल्हन जेलिका को लेकर गाँव लौटा तो बिरादरी के प्रमुखों ने उसे समाज से बाहर कर दिया क्योंकि वो पहले कालूराम था और अब उसने मज़हब बदल लिया और अब उस्मान शेख उसकी पहचान है.
मगर कालू कहें या उस्मान, उसे इसका कोई मलाल नहीं है.
वो कहते हैं,'' अगर मेरी ही जाति में लड़की मिल जाती तो मेरा बड़ा और छोटा भाई कुंवारा नही बैठा रह जाता. फिर मेरा दिल मिला और मैंने शादी कर ली, गाँव वाले नही चाहेंगे तो नहीं आऊंगा, मैं अपनी दुनिया में मस्त हूँ.''
चैनपुर में श्रवण रिश्ते में कालूराम के चाचा लगते हैं.
वो कहते हैं कि कालूराम ने जब धर्म ही बदल लिया तो हमारा उससे क्या लेना देना. उसे सोचना चाहिए था कि गाँव में उसके रिश्तेदारों के बच्चों की शादियाँ अब कैसे होगीं.
उनका कहना है,'' हमने उसे समझाया की चलो शादी कर ली कोई बात नहीं, मगर धर्म तो मत बदल, मगर वो नहीं माना.''
इसी गाँव के भियाराम कहते हैं कि इस शादी से बिरादरी का दिल टूट गया.
भियाराम का सोच इससे आगे जाता है. वो कहते हैं,'' लड़कियों की घटती संख्या एक दुखद सचाई है. हमारे यहाँ एक हज़ार लड़कों पर 865 लड़कियाँ ही हैं. इस तरह 135 लड़कियों की कमी है. मगर धर्म से बाहर शादी पहली बार हुई है.''
'बड़ा संकट'
भियाराम कहते हैं कि ये संकट बड़ा है. कालूराम के घर में जब किसी बुजुर्ग की मौत होगी तो एक भाई कहेगा कि हिंदू रीति से अंतिम संस्कार होगा तो दूसरा कहेगा मुस्लिम रस्म से.
गाँव के बुजुर्ग गोविन्दराम कहते हैं कि इस घटना से गाँव के लोगों की बड़ी बदनामी होगी. हम जब रिश्ते के लिए जाएँगे तो लोग कहेंगे कि आपके यहाँ तो दूसरे धर्म में शादियाँ होती हैं.
कालूराम या उस्मान की माँ धड़की बाई कहती हैं,'' ये बेटे का अपना फ़ैसला है. मैं क्या कर सकती हूँ. दुल्हन अपने पति के साथ वापस लौट गई. वो खुश रहें, मुझे क्या करना है. ये दोनों यहाँ रहते तो विवाद होता.''
वो कहती हैं कि ये बात सही है कि यहाँ शादी मुश्किल से हो रही थी. मेरे बड़े बेटे की दुल्हन के गहने बने रखे है, मगर दुल्हन नहीं मिल रही है.
इस इलाक़े के सामाजिक कार्यकर्ता पंडित श्रीरामजी कहते हैं कि समाज में बेटों की चाहत बढ़ रही है इसीलिए बेटियों की संख्या कम हो रही है. ये बहुत ही दुर्भाग्यजनक है.
महिला संगठनों का कहना कि राज्य में बड़े पैमाने पर कन्या भ्रूण हत्या हो रही है.
इन संगठनों का कहना है कि राज्य में डॉक्टरों का एक समूह भ्रूण परीक्षण में शामिल है. सरकार ने सबूतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की.
राज्य के धौलपुर जिले मे लिंग अनुपात सबसे कम है. वहाँ प्रति हज़ार पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की संख्या 828 है.
धौलपुर की एक महिला कार्यकर्ता ने बीबीसी को बताया हालत बहुत ख़राब है. गाँव में कुंवारे लड़के बैठे हैं और अब तो दूसरे राज्यों में भी लड़कियाँ नहीं मिल रही हैं.
शेखावटी अंचल में पहले भी जाट बिरादरी में महाराष्ट्र से दुल्हनें आती रही हैं. मगर ये पहला मौक़ा है जब किसी युवक ने शादी के लिए मज़हब बदल लिया हो.
सरकारी अभियान के नारे दीवारों पर चस्पा हैं और हर इश्तिहार की इबारत कहती है, बेटा बेटी एक समान. मगर ये नारे हालत को बदल नही पाए हैं.