मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 02:13 GMT तक के समाचार
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा है कि दलित के घरों से लौटने पर 'विशेष साबुन' से नहाते हैं.
उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी का धूप और अगरबत्ती से शुद्धिकरण भी किया जाता है.
कांग्रेस ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि उत्तरप्रदेश में राहुल गांधी के सफल दौरों से ईर्ष्या के कारण मायावती ऐसा कह रही हैं.
मायावती के इस बयान से ज़ाहिर होता है कि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच मधुर संबंधों का या युद्धविराम का दौर समाप्त हो गया है.
हालांकि दलितों के मसले पर कांग्रेस और बसपा के बीच खींचतान दो महीने पहले से चलती दिख रही है.
तीखे आरोप
आजमगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रही मायावती ने सोमवार को कहा, "कांग्रेस दलितों को लुभाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रही है और वह अपने राजकुमार (राहुल गांधी) को दलितों के साथ रहने और खाने के लिए भेज रही है जिससे कि उनके वोट लिए जा सकें."
उन्होंने कहा, "मुझे पता चला है कि राहुल गांधी जब भी दलितों के साथ मिलकर और खाना खाकर दिल्ली में अपने घर लौटते हैं तो उन्हें विशेष साबुन से नहलाया जाता है और धूप-अगरबत्ती से उनका शुद्धिकरण किया जाता है."
उन्होंने राहुल गांधी के दलित प्रेम को ढोंग करार दिया है.
उधर कांग्रेस ने मायावती के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि पिछले दिनों राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की सफल यात्राओं से ईर्ष्या के कारण मायावती ऐसा कह रही हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "दलितों को लेकर सिर्फ़ घड़ियाली आँसू बहाने की जगह राहुल गांधी ने उनके प्रति अपनी सच्ची चिंता ज़ाहिर की है."
वैसे दलितों को लेकर बयानों की शुरुआत कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से ही हुई थी.
पिछले हफ़्ते कानपुर में हुए कांग्रेस सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया था कि मायावती और उनकी सरकार दलितों की सुध नहीं ले रही है.
उन्होंने एक दलित के हवाले से कहा था कि इंदिरा गांधी और कांशीराम के बाद किसी ने दलितों की सुध नहीं ली.
इससे पहले दलितों की राजनीति पर खींचतान तब दिखी थी जब इटावा ज़िले के अमीनाबाद गाँव में पाँच दलितों की हत्या कर दी गई थी.
पहले राहुल गांधी ने वहाँ जाकर पीड़ित परिवार से मिलने की घोषणा की तो मायावती आनन-फ़ानन में पहले वहाँ जा पहुँचीं.
इसके अलावा राहुल गांधी अपनी 'भारत की खोज' यात्रा के दौरान उड़ीसा में दलितों और आदिवासियों को ख़ास तवज्जो दी थी.