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मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 14:35 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

कश्मीरः सामुहिक कब्रों की जाँच की माँग

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार से अपील की है कि कश्मीर घाटी में पाई गई सैकड़ों लावारिस कब्रों की तुरंत जांच के आदेश दें.

इन कब्रों को एक संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ़ द पैरेंट ऑफ़ डिसअपीयर्ड परसन्स’ (एपीडीपी) के लोग 14 महीने के लंबे सर्वे के बाद खोज पाए.

यह संस्था भारत प्रशासित कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ़्तारी से लापता हुए लोगों के माता-पिता ने बनाई है.

एपीडीपी का अंदेशा है कि पिछले दिनों राज्य के 18 गांवों में पाई गई इन क़ब्रों में उन लोगों के शव हो सकते हैं जो पिछले 19 बरसों से लापता हैं.

कश्मीर में लापता लोगों में एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो पिछले 19 बरसों के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों या पुलिस के द्वारा हिरासत में लिए गए और फिर उनका कोई अता-पता नहीं चला.

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर की जानी चाहिए.

संगठन ने कहा, “भारत सरकार को इस मामले में अंतरराष्ट्रीय शर्तों का पालन करना चाहिए. साथ ही छह फ़रवरी 2007 को संयुक्त राष्ट्र के साथ किए गए उस समझौते पर किए गए हस्ताक्षर पर क़ायम रहना चाहिए जो लापता लोगों के बारे में है.”

उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द पिछले बरसों में ग़ायब हुए लोगों और ऐसे मामलों की जांच करानी चाहिए.

'पूरी जांच हो'

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि लावारिस कब्रों के भीतर के कंकालों की जांच संयुक्त राष्ट्र के मानकों के आधार पर फ़ोरेंसिक जानकारों से करवाई जानी चाहिए.

उन्होंने भारत सरकार से कहा कि इन मामलों की जांच के लिए ज़रूरी प्रबंध किए जाएं और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सहयोग लिया जाए.

संगठन ने फ़ौरी तौर पर कब्रों के आस-पास सुरक्षा के उपायों को पुख़्ता करने की बात कही है जिससे वहां सबूत बचे रह सकें.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि नामालूम लोगों की कब्रों के पाए जाने से साफ़ पता चल रहा है कि राज्य सरकार ग़ायब हो रहे लोगों के मामले की जांच की ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाई है.

हालांकि भारत प्रशासित कश्मीर की सरकार इन लावारिस कब्रों की जांच के आदेश जारी कर चुकी है.

कश्मीर घाटी में पुलिस महानिदेशक एसएम साही ने बीबीसी को बताया कि लापता हो रहे लोगों के संज्ञान में आए सभी मामले की पुलिस ने जांच की है और जहां कहीं भी ज़रूरी है वहां केस भी दर्ज किया गया है.