मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 07:08 GMT तक के समाचार
दुर्गेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
अमिताभ बच्चन ने कहा है कि कोई चाहे कुछ भी कह ले या कर ले लेकिन वो किसी भी सूरत में मुंबई छोड़कर नहीं जाएँगे.
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में पहली बार अमिताभ ने खुलकर अपने खिलाफ़ की जा रही लामबंदी और आरोपों का जवाब देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है.
अमिताभ के इस बयान को राज ठाकरे समर्थित महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के पिछले कुछ दिनों से उनके ऊपर चले आ रहे हमले और शिवसेना के मुखपत्र सामना में लगाए गए आरोपों के जवाब के रुप में देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा है कि उनके ऊपर अपने प्रदेश (उत्तर प्रदेश) को बढ़ावा देने और अपनी कर्मभूमि के विकास में रुचि न दिखाने का जो आरोप पिछले कुछ दिनों से लगाया जा रहा है, इससे उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता.
'सब कुछ मुंबई ने दिया'
अमिताभ ने कहा है, "मैं मुंबई छोड़कर कहीं नहीं जा रहा हूँ, चाहे कितने ही बोतलें मेरे घर में फेंकीं जाएँ चाहे मेरे जितने भी पुतले फ़ूँके जाएँ. भले ही कोई मेरी फिल्मों के पोस्टर फाड़े या स्क्रिनिंग रुकवाए, मैं डरकर कहीं नहीं जाने वाला."
उन्होंने यह भी कहा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उनके ख़िलाफ़ चाहे कितनी भी बातें क्यों न कहीं जाएँ या झूठे मामले में फँसाने की कोशिश की जाए, वे मुंबई में ही रहेंगे.
अमिताभ ने अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान पर लगातार हो रहे हमले के जवाब में पहली बार इतना भावुक होकर बयान दिया है.
मुंबई में बाहरी होने के आरोप के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं इस शहर में बाहरी होने की कल्पना भी नहीं कर सकता,ये शहर उतना ही मेरा है जितना किसी अन्य भारतीय का."
उन्होंने कहा, "मैं इस शहर में 1968 में आया था और मुझे यहाँ आने के लिए किसी वीज़ा की ज़रुरत नहीं पड़ी थी. पिछले चालीस सालों से ये शहर मेरा घर है, मैने यहाँ अपनी पहली कार ख़रीदी, घर ख़रीदा. मेरी पत्नी से मेरी मुलाकात इसी शहर में हुई और मेरे दोनों बच्चे यहीं पैदा हुए. मेरे माँ-बाप ने अपना अंतिम क्षण मुंबई में गुज़ारा और यहीं पर अपनी अंतिम सांसें लीं. उन्हें यहीं जलाया गया और उनकी राख इसी मिट्टी में समाहित है. इस शहर ने मुझे नाम, शोहरत सब कुछ दिया है."
सीख की ज़रुरत नहीं
उल्लेखनीय है कि हाल ही में शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में होगेनक्कल विवाद से जुड़े दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत से उनकी तुलना करते हुए कहा था कि जिस तरह से रजनीकांत ने अपनी जन्मभूमि कर्नाटक के खिलाफ़ अपनी कर्मभूमि तमिलनाडू का साथ दिया उससे दूसरे लोगों को भी सीख लेने की ज़रुरत है. हालांकि बाद में खुद बाल ठाकरे ने अमिताभ का बचाव किया था.
'सामना' की टिप्पणी का जवाब देते हुए अमिताभ ने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं रजनीकांत का दोस्त हूँ और मेरी उनसे तुलना बेमानी है. बाला साहेब मेरे लिए पिता जैसे हैं और हमेशा रहेंगे. मेरे माता पिता ने मुझे ये सिखाया है कि जब बड़े बोल रहे हों तो छोटों को उनकी बात शांत होकर सुननी चाहिए. मैं उनकी या उनसे जुड़ी हुई किसी भी संस्था की बात को आदर के साथ स्वीकार करता हूँ."
अमिताभ ने कहा कि वो अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ पर ही कोई काम करेंगे.
उन्होने कहा वे किसी भी प्रदेश के लिए काम करेंगे चाहे वो यूपी-बिहार हो, पंजाब हो या तमिलनाडु.
उनका कहना है, "पूरे देश के लोगों ने मुझे इतना सम्मान और प्यार दिया है कि पूरा देश मेरी नज़र में एक है और मुझे किसी के सुझाव की ज़रुरत नहीं है कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं."
एक और दिलचस्प बात अमिताभ ने अपने जवाब में कही है कि वे सिर्फ़ अंग्रेज़ी के तीन 'सी' को मानते हैं पहला कोर्ट यानी अदालत, दूसरा कॉन्सटिट्यूशन यानी संविधान और कॉन्सियंस यानी अंतरआत्मा.
उन्होंने कहा, "लोगों को मुझसे सवाल पूछने का हक़ है जो उन्हें जरुर पूछना चाहिए लेकिन उन्हें मेरे किसी भी काम का सबूत मांगने का कोई हक नहीं है."