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मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 14:01 GMT तक के समाचार

अंबेडकर पार्क में इमारत बनाने पर रोक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अंबेडकर पार्क योजना मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार पर पार्क में और आसपास कोई भी स्थायी इमारत बनाने पर रोक लगा दी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर अंबेडकर पार्क में सिर्फ़ मरम्मत और नवीकरण की इजाज़त होगी.

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भीमराव अंबेडकर और उनकी पत्नी की स्मृति में लखनऊ में स्मारक बनाए जाने की मुख्यमंत्री मायावती की महत्वाकांक्षी योजना पर रोक लगा दी थी.

मायावती सरकार ने हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

इसी अपील पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंबेडकर पार्क योजना पर अपना यह आदेश जारी किया है.

अंबेडकर पार्क

राज्य की मुख्यमंत्री मायावती की यह महात्वाकांक्षी अंबेडकर पार्क परियोजना शुरुआत से ही विवादास्पद रही है.

यह स्मारक राजधानी लखनऊ की ग्रीनबेल्ट घोषित ज़मीन पर बनाया जा रहा है.

अदालत ने इस ज़मीन पर इस तरह के किसी निर्माण की रोक लगा रखी थी पर राज्य सरकार ने अदालती रोक के बावजूद ज़मीन का पार्क के निर्माण में उपयोग करने के आदेश जारी किए थे.

इस परियोजना पर क़रीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने थे. विपक्षी दलों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्य में इस पैसे का बेहतर उपयोग हो सकता है. इस परियोजना में धन लगाना लोगों के पैसे का दुरूपयोग है.

हालांकि मुख्यमंत्री मायावती राज्य सरकार की इन परियोजनाओं को उचित ठहराती हैं और कहती रही हैं कि समाज के दलित वर्ग की प्रेरणा के लिए ऐसा किया जा रहा है.

महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ

बीआर अंबेडकर और उनकी पत्नी रमा बाई को दलित वर्ग के लिए गौरव के प्रतीक के रुप में स्थापित करने के लिए मायावती ने दो महत्वाकांक्षी परियोजना बनाई थीं.

इसके तहत अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल बनाया जाना था, और रमाबाई रैली स्थल का निर्माण होना था.

मुख्यमंत्री ख़ुद दलित वर्ग से आती हैं और उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी भी दलितों की राजनीति करते हुए सत्ता तक पहुँची है.

अपने पहले कार्यकाल में भी मायावती ने ऐसे भव्य स्मारकों का निर्माण किया था. अंबेडकर ग्राम परियोजना भी उनके द्वारा शुरू की गई ऐसी योजनाओं की एक बानगी है.

इस बार भी सत्ता में बहुमत के साथ आने के बाद मायावती ने ऐसे स्मारकों और भवनों, स्मृति स्थलों, मैदानों के निर्माण को अपनी कार्य योजना में शामिल किया है.

पर कभी भ्रष्टाचार तो कभी अत्यधिक खर्चीले होने का आरोप भी इन योजनाओं पर लगता रहा है.