शनिवार, 05 अप्रैल, 2008 को 06:32 GMT तक के समाचार
अमरीकी रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका देश अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है जो वहाँ तैनात नैटो सैनिकों की मदद करेंगे.
उनका कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की संख्या बढ़ाना इराक़ से सैनिकों की संभावित वापसी पर निर्भर नहीं होगा.
गेट्स के मुताबिक़ अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने रोमानिया में चल रहे नैटो के सम्मेलन में यह पेशकश की है.
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि और सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजने का अंतिम फ़ैसला हालाँकि अगले राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में 'सफलता' के प्रयास को दोनों दलों का समर्थन हासिल है.
इस समय अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 17 हज़ार अमरीकी सैनिक तैनात हैं.
रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से खाड़ी देश ओमान की यात्रा पर निकले गेट्स ने कहा, "राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि उन्हें वर्ष 2009 में अमरीका की तरफ़ से अतिरिक्त योगदान की उम्मीद है."
'राष्ट्रपति बदलेंगे, प्राथमिकता नहीं'
गेट्स ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों के साथ लड़ाई अगले राष्ट्रपति की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी भले ही वो किसी भी राजनीतिक दल से हों.
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि यह एक ऐसा इलाक़ा है जहाँ सफलता की कोशिशों को अमरीका में व्यापक दोतरफ़ा समर्थन है और अगला राष्ट्रपति कोई भी चुना जाए, वह वहाँ सफलता चाहेगा."
इससे पहले फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में संकट की आशंकाओं को यह कहकर कम कर दिया था कि उनका देश अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिकों को तैनात करेगा.
अमरीका का कहना है कि फ़्रांस से एक हज़ार अतिरिक्त सैनिकों के जाने की उम्मीद है और तब वह अपने कुछ सैनिकों को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान भेज सकेगा जहाँ कनाडा ने नैटो से सैनिकों को भेजने की माँग की है.
कनाडा की संसद ने पिछले महीने अपने सैनिकों को इसी शर्त पर 2011 तक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात रखने को हरी झंडी दी है जब अशांत दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में दूसरे सहयोगी देश भी सैनिक भेजें.
बीबीसी के रक्षा और सुरक्षा संवाददाता रॉब वाटसन का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस समय अनुमानित तौर पर सात हज़ार से दस हज़ार सैनिकों की कमी है.