बुधवार, 02 अप्रैल, 2008 को 17:48 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश
चार दिनों की गहमागहमी और उठापटक के बाद सिसौली ने राहत की साँस ली है.
पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान नेता ताऊ महेंद्र सिंह टिकैत मायावती सरकार के साथ दो दो हाथ करने के बाद भी ससम्मान वापस घर पहुँच गए हैं.
तमाम कोशिश के बावजूद पुलिस उन्हें जेल नहीं ले जा पाई.
सरकार ने महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत को भी हिरासत से मुक्त कर दिया है. सरकार राकेश टिकैत के ज़रिये ही टिकैत पर दबाव बनाए हुए थी और आख़िर सरकार को बीच का रास्ता निकालना पड़ा.
उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बारे में उनकी कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में बुधवार को टिकैत को हिरासत में ले लिया गया था.
उन्हें बिजनौर की अदालत से ज़मानत मिल गई थी लेकिन पुलिस उन्हें फिर गिरफ़्तार करना चाहती थी. लेकिन बाद में मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर पुलिस ने अपना इरादा बदल लिया.
किरकिरी
इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार और विशेषकर पुलिस ने जिस तरह कार्रवाई की और बार-बार अपने क़दम वापस खींचे और बयान बदले उससे सरकार की काफ़ी किरकिरी हुई.
सरकार ने न केवल किसान और विशेषकर जाट समुदाय को नाराज़ किया, बल्कि दलित समुदाय को भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाई जो टिकैत के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा था.
मायावती विरोधी कुछ दलित नेता यह आरोप लगा रहे थे कि मायावती इस बार ऊँची जातियों के दबाव में हैं और इसलिए दलित उत्पीड़न के मामलों मे सख्त कार्यवाही नहीं कर रही हैं.
समझा जाता है कि मायावती अपने प्रति महेंद्र सिंह टिकैत के कथित अपमानजनक भाषण के बहाने दलित समुदाय को संदेश देना चाहती थीं. लेकिन टिकैत ने अपनी सूझबूझ से पुलिस से टकराव भी बचा लिया और अपना स्वाभिमान भी.
और मायावती के प्रति अपनी भाषा के बारे में खेद प्रकट कर भी उन्होंने परिपक्वता का पारिचय दिया.
टिकैत करीब पचीस सालों से किसानों की सक्रिय राजनीति में हैं और इस दौरान उन्होंने अनेक मुख्यमंत्रियों और अफसरों से लोहा लिया है.
नाटकीय घटनाक्रम
मुख्यमंत्री मायावती के बारे में महेंद्र सिंह टिकैत की कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले ने तूल पकड़ लिया था.
हालांकि बुधवार की शाम बिजनौर की अदालत ने महेंद्र सिंह टिकैत को ज़मानत दे दी थी पर पिछले दो दिनों में टिकैत के गांव में हुई हिंसा के मामले में मुजफ़्फ़रनगर से उनके ख़िलाफ़ एक ताज़ा वारंट जारी हो गया था.
टिकैत को दोबारा गिरफ़्तार करने की कोशिश की जा रही थी. हालांकि पुलिस की इस कोशिश का टिकैत समर्थकों ने पुरज़ोर विरोध किया और उनकी गिरफ़्तारी संभव नहीं हो सकी.
टिकैत ने अदालत परिसर में ही धरना शुरू कर दिया था. उनका कहना था कि बाहर बड़ी तादाद में पुलिस तैनात है और जैसी स्थितियाँ बन रही हैं उससे उनकी जान को ख़तरा है.
इससे पहले कि हालात और बिगड़ते लखनऊ से पुलिस को आदेश मिले कि टिकैत पर कोई कार्रवाई न की जाए और उन्हें सुरक्षित जाने दिया जाए.
पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने पत्रकारों को बताया कि चूँकि महेंद्र सिंह टिकैत में खेद प्रकट कर दिया है इसलिए मुख्यमंत्री ने आदेश दिए हैं कि इस मामले को लेकर उन्हें या उनके परिवारजनों को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए.
अब पुलिस ने कहा है कि सिसौली की हिंसा के मामले में कार्रवाई अब जाँच पूरी होने के बाद ही की जाएगी.
पुलिस पर दबाव
उल्लेखनीय है कि इन तीन दिनों में पुलिस को कई बार लोगों के दबाव में अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी या कार्रवाई का इरादा बदलना पड़ा.
मज़बूत जनाधार वाले नेता होने के कारण टिकैत की गिरफ़्तारी से पहले मुजफ़्फ़रनगर स्थित महेंद्र सिंह टिकैत के गाँव सिसौली में सैकड़ों की तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए क्योंकि उनकी गिरफ़्तारी को लेकर गाँव में तनाव था और किसान उनकी गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे.
पुलिस पिछले दो दिनों से उनकी गिरफ़्तारी की कोशिश कर रही थी, पुलिस को सोमवार को पीछे हटना पड़ा था कि क्योंकि पथराव और पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हो गए थे.
इसके बाद पुलिस ने टिकैत, उनके चार बेटों और 14 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ जातिवादी टिप्पणी के लिए आपराधिक मामला दर्ज किया. बुधवार को टिकैत को हिरासत में ले लिया गया.
हालांकि टिकैत के वकीलों का कहना है कि टिकैत ने ख़ुद अदालत में आत्मसमर्पण किया था.
पुलिस पिछले दो दिनों से उनकी गिरफ़्तारी की कोशिश कर रही थी, पुलिस को सोमवार को पीछे हटना पड़ा था क्योंकि पथराव और पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हो गए थे.