बुधवार, 02 अप्रैल, 2008 को 22:29 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी पूर्वोत्तर राज्य संवाददाता
भूटान में लोकतंत्र की स्थापना के लिए पहली बार हुए चुनाव ही विवाद में आ गए हैं. वहाँ हार का सामना करने वाली पार्टी पीडीपी ने चुनाव में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं.
पार्टी ने इस मामले में कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील की है.
उल्लेखनीय है कि 24 मार्च को हुए संसदीय चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को सिर्फ़ दो सीटें मिल सकी थीं जबकि भूटान यूनाइटेड पार्टी को 45 सीटें मिली थीं.
पीडीपी के महासचिव लैप केज़ांग ने राजधानी थिम्पू में पत्रकारों को बताया कि उनकी पार्टी ने भूटानी हाईकोर्ट में अपील की है कि वह 24 मार्च को हुए चुनावों के विभिन्न पहलुओं की जाँच करे.
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हाईकोर्ट जाँच करे कि किस तरह सरकारी कर्मचारियों और शहरी मतदाताओं ने शेष मतदाताओं को प्रभावित किया और वह यह भी जाँच करे कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के उपयोग और डाक से भेजे मतों की गिनती में किसी तरह की ग़लती तो नहीं हुई."
लैप केज़ांग का कहना था, "हम चाहते हैं कि अदालत इस बात की भी जाँच करे धर्म और क्षेत्रीयता का चुनाव में किस तरह दुरुपयोग किया गया, ख़ासकर देश के पूर्वी और दक्षिणी भाग में."
हालांकि उन्होंने 'धर्म और क्षेत्रीयता के दुरुपयोग' का कोई विवरण नहीं दिया.
हालांकि पीडीपी के महासचिव ने यह साफ़ कर दिया है कि वे चुनाव प्रक्रिया को चुनौती नहीं देने जा रहे हैं.
पीडीपी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनके सदस्य इस्तीफ़ा नहीं देने जा रहे हैं जैसा कि उन्होंने धमकी दी थी.
उल्लेखनीय है कि संसद के निचले सदन के लिए 24 मार्च को चुनाव हुए थे जिसमें देश की दो पार्टियों ने हिस्सा लिया था.
दोनों पार्टियों का नेतृत्व पूर्व मंत्रियों के हाथ में है. पीपुल्ल डेमोक्रेटिक पार्टी की कमान संभाल रहे हैं संगय नगेडप, जो पूर्व राजा की पत्नी के भाई हैं.
जबकि भूटान यूनाइटेड पार्टी का नेतृत्व जिग्मे थिनली कर रहे हैं और शाही परिवार से उनका कोई संबंध नहीं है.
लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी को भूटान की आम जनता से जोड़ने की कोशिश की है.
भूटान में संसद के ऊपरी सदन के लिए दिसंबर में चुनाव हुए थे.