सोमवार, 31 मार्च, 2008 को 11:27 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, कानपुर से
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए जेल भरो जैसा आंदोलन चलाने का आह्वान किया है.
वहीं उनके बेटे और पार्टी के महासचिव राहुल गाँधी ने कहा कि राज्य में दलितों के साथ धोखा हो रहा है.
सोनिया और राहुल सोमवार को कानपुर शहर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की आम सभा के विशेष अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे.
मायावती सरकार के ख़िलाफ़ दोनों नेताओं के भाषण और संघर्ष के आह्नान पर कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार तालियाँ बजाई और कहा कि वे जेल जाने को तैयार हैं.
इस पर सोनिया गांधी ने पीछे मुड़ कर मंच पर बैठे राहुल गांधी की ओर देखते कहा, "ज़रूरत हुई तो राहुल भी यहाँ आएंगे और आपके साथ जेल जाएंगे."
सोनिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के कर्ज़ की माफ़ी, रोज़गार गारंटी और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं के लिए राज्य को करोड़ों रुपया दिया लेकिन उसका यहाँ ठीक से इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार से इन पैसों का हिसाब माँगने के लिए आंदोलन चलाना चाहिए.
सोनिया ने कुछ नेताओं के भाषणों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में पार्टी की कमज़ोरी का कारण केवल दूसरी पार्टियों की जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति नहीं है बल्कि कांग्रेस संगठन और हम लोगों से भी कुछ ग़लतियां हुई हैं और इसके लिए हमें आत्ममंथन करना होगा.
'नाव डूबी तो बचेगा कोई नहीं...'
कार्यकर्ताओं ने उस समय ज़ोरदार तालियाँ बजाई जब सोनिया ने कहा कि कुछ लोग संगठन के बजाय अपने हितों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं.
उन्होने ऐसे नेताओं को चेताया कि, "हम सब एक ही नाव पर सवार हैं. नाव बचेगी, तभी बचेंगे नहीं तो सभी डूब जाएँगे."
इससे पहले राहुल गाँधी ने कहा कि वो कर्नाटक के दौरे पर थे जहाँ उन्हें उत्तर प्रदेश के बेरोजगार युवक मिले.
राहुल ने बताया कि उन युवकों का कहना था कि राज्य में उनके लिए अवसर नहीं है और कर्नाटक में ही उनका भविष्य है.
निशाने पर बसपा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस का ये दो दिवसीय अधिवेशन कानपुर के नानाराव पार्क में हुआ. अब से 26 साल पहले इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की अगुवाई में यहीं पर सम्मेलन हुआ था.
पार्टी की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई और अन्य नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि जब सम्मेलन के बाद कार्यकर्ता एक बार फिर से गाँव-गाँव में ग़रीब लोगों से जुड़ेंगे तो उत्तर प्रदेश में पार्टी फिर से उठ खड़ी होगी.
हालांकि इससे पहले कई वक्ताओं ने कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के रंग-ढंग पर कड़ी नुक्ताचीनी की लेकिन सम्मेलन के बाद आम कार्यकर्ता ये कहते पाए गए कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी को मज़बूत करने की ये कसरत कुछ न कुछ लाभ ज़रूर देगी.
पूरे सम्मेलन के दौरान बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर रहीं जो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी हैं.
प्रधानमंत्री पद की अपनी दावेदारी मज़बूत करने के मक़सद से मायावती देश भर में दलितों को रिझाने के लिए रैलियां कर रही हैं और उन रैलियों में सोनिया समेत कांग्रेस नेताओं की आलोचना कर रही हैं.
ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने मायावती से अपने लिए ख़तरा भाँप लिया है और इसलिए अब माया सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष का ऐलान किया गया है.
प्रेक्षकों का कहना है कि सोनिया ने पिछले दस वषों की राजनीति में इससे पहले इतना आक्रामक भाषण कभी नहीं दिया.
उनका कहना था, "अगर आप जेल जाने के लिए तैयार नहीं हैं तो फिर उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापस नहीं आ सकते."
फूलबाग की रैली
सम्मेलन के बाद शाम को फूलबाग मैदान में एक रैली को संबोधित करते हुए सोनिया ने पिछले 19 सालों में उत्तर प्रदेश में शासन करने वाली तीनों पार्टिय़ों बीजेपी सपा और बसपा की आलोचना करते हुए कहा कि ये तीनों ही एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं और इनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पिछड़ गया और राज्य में अपराध बढ़े, मुश्किलें बढ़ीं हैं.
सोनिया ने खास कर किसानों का ज़िक्र किया और कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि जीवनदाता है और उसे उसकी मेहनत का वाजिब फल मिलना चाहिए.
उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी की मायावती सरकार आम जनता की आवाज़ की अनदेखी कर रही है.
इससे पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक नया नारा दिया.. कांग्रेस के दोनों हाथ ग़रीबों के साथ.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को एक तलवार और सोनिया गांधी को किसान का हल प्रतीक चिन्ह के रुप में भेंट किया.
कानपुर के हिसाब से फूलबाग मैदान की यह रैली अच्छी मानी जा रही है.
सोनिया गांधी और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने इस अधिवेशन के ज़रिए लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को झकझोरने की कोशिश की है.
लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिए केवल नारे और जेल जाना पर्याप्त नहीं है.
कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए ज़मीन पर कड़ी मशक्कत करके लोगों को सत्ता में हिस्सेदारी का कोई ठोस कार्यक्रम देना होगा.