सोमवार, 31 मार्च, 2008 को 18:40 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने नक्सलियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान 'सलवा जुडूम' पर आपत्ति जताई है और आम लोगों को हथियार देने को ग़लत बताया है.
छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर राज्य में नक्सलियों से निपटने के लिए सलवा जुडूम अभियान चल रहा है.
इसके तहत आम लोगों को चुन कर उन्हें नक्सलियों से लड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है और बदले में मानदेय मिलता है.
इन स्थानीय लोगों का परिवार हमेशा नक्सलियों के निशाने पर होता है जिसके कारण ये लोग विभिन्न केंद्रों में रहते हैं.
इन शिविरों की कथित दयनीत हालत पर दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.
अदालत का कहना था कि सरकार निजी व्यक्तियों को हथियार सौंप कर लड़ने के लिए प्रेरित नहीं कर सकती, यह अपराध है.
अदालत ने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र एजेंसी को स्थिति का आकलन करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें पुलिस, सेना अथवा अर्धसैनिक बलों की मदद ले सकती है, लेकिन निजी व्यक्तियों को हथियार सौंप कर लड़ने और मारने के लिए प्रेरित नहीं कर सकती.
इसके पहले याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई ने कहा कि सलवा जुडूम कैम्पों की हालत बहुत ख़राब है.
दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम ने कहा कि वे मानते हैं कि समस्या गंभीर है और सरकार ने वहां के जनजातीय क्षेत्र से रिपोर्ट मांगी है.
उन्होंने ये रिपोर्ट आने के बाद ही अदालत से इस मामले में कोई आदेश पारित करने की अपील की.
पीठ ने मामले की सुनवाई 15 अप्रैल तक स्थगित कर दी है.