रविवार, 30 मार्च, 2008 को 04:29 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की आम सभा का अधिवेशन 26 साल बाद रविवार को कानपुर में होने जा रहा है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस अधिवेशन से पार्टी संगठन को अगले लोक सभा चुनाव के लिए तैयार करने की कोशिश की जाएगी ताकि दल के खोए हुए जनाधार को वापस हासिल किया जा सके.
ये अधिवेशन कानपुर में फूलबाग से सटे नानाराव पार्क में हो रहा है. अधिवेशन के पहले दिन क़रीब दो हज़ार प्रदेश कमेटी सदस्य हिस्सा लेंगे और दूसरे दिन पार्टी के 60 हज़ार सक्रिय सदस्य शामिल होंगे.
ये अधिवेशन कई मायनों में महत्वपूर्ण है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पिछला अधिवेशन 1982 में कानपुर में ही हुआ था और वर्ष 2008 में अधिवेशन फिर कानपुर में हो रहा है.
इस अधिवेशन में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी भी शामिल होंगे.
सोनिया गांधी सम्मेलन के समापन के बाद एक रैली को भी संबोधित करेंगी.
राहुल की मुहिम
हाल ही में पार्टी के महासचिव बनाए जाने के बाद से राहुल गांधी ने कांग्रेस में नई जान डालने और लोकतंत्र की बहाली की बातें कही हैं और वो जनता से संवाद बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं.
इसी सिलसिले में उन्होंने झारखंड, उड़ीसा और कर्नाटक का दौरा किया.
लेकिन राहुल और सोनिया दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश है जहाँ लोक सभा की सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं.
लेकिन 1989 के बाद से पार्टी का ग्राफ़ लगातार नीचे गिरता रहा है. पिछले लोक सभा चुनाव में मात्र 10 सीटें मिली थीं.
पार्टी का परंपरागत दलित, मुस्लिम और बाह्मण मतदाता निराश होकर दूसरे दलों में चला गया है और कुछ गिने चुने नेताओं के चुनाव क्षेत्रों में ही कांग्रेस उनके निजी प्रभाव के कारण जीवित है.
इस बैठक में कांग्रेस सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के बारे में अपनी नीति का खुलासा करेगी.
प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि कांग्रेस ‘हिसाब मांगों अभियान’ चलाएगी जिसमें मायावती सरकार से उनके वादों का हिसाब माँगा जाएगा.
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री मायावती ने क़ानून व्यवस्था को सुधारने, भ्रष्टाचार समाप्त करने जैसे वादे किए थे और उनको लेकर अब तक वो जनता को भ्रमित करती रही हैं, उसको पार्टी उजागर करेगी.