बुधवार, 26 मार्च, 2008 को 14:45 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में रहने वाले निर्वासित मुस्लिम तिब्बतियों ने ल्हासा में चीनी कार्रवाई के विरोध में निकाले गए एक प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया.
बुधवार को क़रीब पचास तिब्बतियों ने तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा की तस्वीर लिए और नारों से सजी टोपी पहने श्रीनगर में एक शांतिपूर्ण मार्च निकाला था.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से माँग की है कि ल्हासा में एक दल भेज कर तथ्यों का पता लगाए.
साथ ही उन्होंने चीन में इस वर्ष होने वाले ओलंपिक खेलों को रद्द करने की भी माँग की है.
वर्ष 1959 से श्रीनगर में निर्वासन में रह रहे किसी तिब्बती मुस्लिम ने प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया. प्रदर्शन में भाग लेने वाले तेंजिग फुनसुक ने बीबीसी को बताया, "हमने उनसे प्रदर्शन में हिस्सा लेने का आग्रह किया था लेकिन वे नहीं आए".
मातृभूमि से प्रेम
हालांकि निर्वासित तिब्बती मुस्लिम का कहना है कि वे ल्हासा में हुई घटनाओं को लेकर चिंतित हैं.
तिब्बती मुस्लिम यूथ फ़ेडरेशन के उपाध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल्लाह कहते हैं, "तिब्बत हमारी मातृभूमि हैं. हमें उसकी चिंता है लेकिन कश्मीर में जो हालात है उसे देखते हुए हम प्रदर्शन नहीं कर सकते."
अब्दुल्लाह कहते हैं, "हमने पोस्टर बनाकर प्रदर्शनकारियों को सहायता पहुँचाई है".
वे कहते हैं, "हमने संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अरब जगत की सरकारों को तिब्बत में हस्तक्षेप करने के लिए लिखा है".