रविवार, 23 मार्च, 2008 को 21:46 GMT तक के समाचार
भारत में लोकसभा चुनाव से पहले वामपंथी दलों ने केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार को आड़े हाथों लिया है और एक बार फिर तीसरे मोर्चे के विकल्प की बात कही है.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने यूपीए की आलोचना करते हुए यहाँ तक कह दिया कि सरकार देश को ग़लत और सामाजिक रूप से अन्यायपूर्ण रास्ते पर ले जा रही है.
वामपंथी दल यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं. हैदराबाद में सीपीआई की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस का उदघाटन करते हुए पार्टी महासचिव एबी बर्धन ने तीसरे राजनीतिक विकल्प पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी सोचती है कि अब समय आ गया है जब हम दोनों कांग्रेस और बीजेपी से अलग वामपंथी और लोकतांत्रिक विकल्प का गठन किया जाए. इस विकल्प के माध्यम से लोगों के मुद्दे पर संघर्ष किया जाए."
विचार-विमर्श
बर्धन ने कहा कि तीसरा विकल्प तैयार करने के लिए समान विचार वाली पार्टियों से विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है.
उन्होंने भारत-अमरीका परमाणु समझौते का भी विरोध किया और कहा कि केंद्र सरकार साझा न्यूनतम कार्यक्रम की अवहेलना कर रही है.
राष्ट्रीय कांग्रेस में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत को भी बुलाया गया था.
उन्होंने कहा कि अन्य लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को एकजुट करके ही सत्ताधारी वर्ग का विकल्प तैयार किया जा सकता है.
विकल्प
कारत ने कहा, "लोगों के सामने तीसरा विकल्प तैयार करने और पेश करने के लिए वामपंथी दलों को ही पहल करनी होगी." उन्होंने बताया कि कैसे यूपीए के पिछले चार वर्षों के कार्यकाल में वामपंथी दलों ने आम जनता के हितों के लिए काम किया है.
सीपीआई की इस 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में एक हज़ार से ज़्यादा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इस सम्मेलन में 30 देशों के वामपंथी प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं. यह सम्मेलन चार दिनों तक चलेगा.
सम्मेलन में भारत-अमरीका परमाणु समझौते के अलावा क़ीमतों में बढ़ोत्तरी, अनाज संकट और असंगठित क्षेत्रों की मुश्किलों पर भी चर्चा होगी. साथ ही अगले चुनाव की रणनीति भी तैयार की जाएगी.
इस सम्मेलन में पार्टी के वरिष्ठ नेता डी राजा और एस सुधाकर रेड्डी के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं.