बुधवार, 19 मार्च, 2008 को 14:49 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, धर्मशाला से
धर्मशाला मे मंगलवार को दलाई लामा के अनुयायियों ने शक्ति प्रदर्शन किया और ये साबित करने की कोशिश की के अभी भी दलाई लामा ही तिब्बतियों के सर्वोच्च नेता हैं, बेशक कुछ संगठन उनसे सहमत ना हों.
इन प्रदर्शनों के बीच ही दलाई लामा ने उन संगठनों के नेताओं से बातचीत भी की जो उनसे सहमत नहीं हैं.
तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा के प्रवक्ता के अनुसार दलाई लामा ने उन्हें संघर्ष का तरीक़ा बदलने की सलाह दी.
इन संगठनों में निर्वासित तिब्बतियों की यूथ कांग्रेस, डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ तिब्बत और कई संगठनों के नेता शामिल थे.
दलाई लामा ने इन नेताओं से चीन सीमा की तरफ़ जारी संगठनों के मार्च को रद्द करने के लिए कहा है.
हांलाकि दलाई लामा के प्रवक्ता का कहना है अब ये संगठनों की ज़िम्मेदारी है की वो दलाई लामा की बात को मानते हैं या नहीं.
संगठनों में मतभेद
दलाई लामा के क़रीबी लोगों को आशा है की ये संगठन बात मान लेंगें.
तिब्बत बौद्ध दर्शन विश्वविद्यालय के अध्यापक लोपचांग दावा कहते हैं," हम ये मानते हैं कि अहिंसक तरीक़े से कुछ देर लग सकती है लेकिन अगर हम अहिंसात्मक रास्ता अपनाते हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र संघ हमारे समर्थन में आएगा और हम अपना मक़सद हासिल कर सकते हैं. और जो लोग आज इस सिद्वांत से सहमत नही हैं वो भी हमारे साथ आएँगें. "
दलाई लामा ने तिब्बत में प्रदर्शनकारियों से हिंसक और टकराव के रास्ते को छोड़ने को कहा है. इसके साथ ही दलाई लामा ने कहा है की वो चीन में होने वाले ओलंपिक खेलों के ख़िलाफ़ भी नहीं हैं.
उनका मानना है की तिब्बत की आज़ादी की बात आज के समय में बेमानी है और फ़िलहाल तिब्बत की स्वायत्तता की बात की जानी चाहिए.
लेकिन निर्वासित तिब्बतियों के कई संगठन हैं जो दलाई लामा के मत से सहमत नही हैं. इन संगठनों की मांग है कि तिब्बत की आज़ादी के साथ ही बीजिंग में होने वाले ओलंपिक रद्द किए जाएँ.
फ़िलहाल ये नेता दलाई लामा की सलाह पर विचार कर रहे हैं और मीडिया से दूरी बनाए हैं. लेकिन सूत्रों के अनुसार दलाई लामा की बात
पर अमल करने के लिए उन पर भारी दबाव बनाया जा रहा है.