मंगलवार, 18 मार्च, 2008 को 09:05 GMT तक के समाचार
मणिपुर की पुलिस का कहना है कि अज्ञात विद्रोहियों ने सात हिंदी भाषी श्रमिकों को मार दिया है. मारे गए लोग बिहारी थे.
पुलिस का कहना है कि 20 हथियारबंद चरमपंथियों ने श्रमिकों पर मयाई लांबी में हमला किया जो राजधानी इंफ़ाल के पास है.
पड़ोसी राज्य असम के मुक़ाबले मणिपुर में हिंदी भाषियों पर हमले बहुत कम होते हैं. असम में पिछले दो साल में क़रीब 150 हिंदी भाषी लोगों को मार दिया गया है.
इन हत्याओं कि ज़िम्मेदारी अब तक मणिपुर के किसी विद्रोही संगठन ने नहीं ली है.
पुलिस का कहना है कि हरे रंग की जैकेट पहने और अपने मुंह को तौलिए से ढके हुए विद्रोहियों ने सोमवार देर शाम श्रमिकों के शिविर पर हमला बोला.
नागरिकों में आतंक
मणिपुर पुलिस प्रमुख वाई जॉयकुमार सिंह ने कहा, "उन्हें खींच कर बाहर लाया गया, पंक्तिबद्ध किया गया और गोली मार दी गई."
एक और हिंदी भाषी व्यक्ति को सोमवार देर शाम इसी थाना क्षेत्र में आने वाले कोमलाखोंग गाँव में गोलियों से मार डाला गया.
हत्याओं के बाद स्थानीय नागरिकों में डर फैल गया. स्थानीय संवाददाताओं के अनुसार हिंसा की इस घटना के बाद नागरिक अपने घरों में बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा.
सुरक्षा बलों पर हमले
मणिपुर के अलगाववादी विद्रोही अब तक नागरिकों के मुक़ाबले भारतीय सुरक्षा बलों पर ज़्यादा हमले किया करते थे.
इसके अलावा, मणिपुर के सबसे शक्तिशाली अलगाववादी गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट (यूएनएलएफ़) के विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने इस सप्ताह बर्मा से लगी राज्य की सीमा के पास एक चौकी पर एक हमले में छह भारतीय सैनिकों को मार दिया है.
उधर भारतीय सेना का कहना है कि एक सैनिक मारा गया है जबकि सात अन्य घायल हुए हैं.
पड़ोसी राज्य असम में अलगाववादी संगठन अल्फ़ा (यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम) हिंदी भाषियों पर लगातार हमले करता रहता है.