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मंगलवार, 18 मार्च, 2008 को 14:09 GMT तक के समाचार

दलाई लामा पर बरसे चीनी प्रधानमंत्री

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरु दलाई लामा और उनके गुट को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हाल में हुई हिंसा को उकसाने का आरोप लगाया है.

जियाबाओ ने तिब्बत में हुई हिंसा को 'सांस्कृतिक जनसंहार' बताने वाले दलाई लामा के बयान को 'झूठ' क़रार दिया है.

पिछले लगभग एक हफ़्ते से तिब्बत में चल रहे तनाव के बारे में ये चीन की ओर से सबसे उच्चस्तरीय प्रतिक्रिया है.

तिब्बत की स्थिति पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन और तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वहाँ हिंसा को तुरंत रोका जाए.

उधर सुरक्षा परिषद के सदस्य के नाते चीन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सुरक्षा परिषद की कोई भूमिका नहीं बनती है. रूस ने चीन के इस तर्क का समर्थन किया है.

प्रदर्शन 10 मार्च को शुरु हुए थे जब दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी. तिब्बत में चल रहे इन प्रदर्शनों के दौरान पिछले हफ़्ते हिंसा भड़क उठी थी.

'मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी'

प्रधानमंत्री जियाबाओ का कहना था कि दंगा करने वाले कुछ लोगों के कारण ही ल्हासा में हिंसा हुई और कई लोगों की जान गई है.

दलाई लामा के 'सांस्कृतिक जनसंहार' के बयान की जमकर आलोचना करते हुए जियाबाओ ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा, "प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए चीन को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी और चीन ने क़ानूनी दायरे में रहकर ही ये कार्रवाई की है."

चीन का दावा है कि पिछले दिनों ल्हासा में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में सिर्फ़ 13 लोग मारे गए थे.

जबकि, तिब्बती नेताओं का कहना है कि चीनी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान 80 लोग मारे गए थे.

दूसरी ओर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ल्हासा में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तिब्बतियों का आंदोलन कुछ अन्य प्रांतों में फैल गया है.

समर्पण की समयसीमा

सोमवार मध्यरात्रि को चीन की ओर से प्रदर्शनकारियों को दी गई आत्मसमर्पण की चेतावनी की समयसीमा समाप्त हो चुकी है.

राजधानी ल्हासा में बड़ी संख्या में सशस्त्र बल और सेना तैनात हैं और शहर में गश्त जारी है.

पिछले दिनों ल्हासा में चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चीन सरकार से संबंधित संपत्ति को नुकसान पहुँचा था.

इसके बाद चीन सरकार की ओर से प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई थी जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी.

चीन ने हिंसा के इस दौर के बाद चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल थे, वे सोमवार रात तक सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दें.

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

तिब्बत में पिछले कुछ दिनों के दौरान रहे घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन की सरकार और तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की है कि वहाँ हिंसा को तुरंत रोकने में अपना योगदान दें.

उधर, यूरोपीय देशों के खेल मंत्रियों की एक बैठक में तिब्बत के घटनाक्रम के आधार पर बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार जैसी बात को खारिज कर दिया गया है.