मंगलवार, 18 मार्च, 2008 को 12:54 GMT तक के समाचार
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि भारत में निर्वासन में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों के विरोध प्रदर्शन के मामले में भारत सरकार की कार्रवाई की वह 'प्रशंसा' करते हैं.
पिछले हफ़्ते चीन की सीमा की तरफ़ बढ़ रहे 100 से भी ज़्यादा निर्वासित तिब्बती प्रदर्शनकारियों को भारत में गिरफ़्तार किया गया था.
ये प्रदर्शन तिब्बत में स्वतंत्रता की माँग को लेकर विश्व स्तर पर हो रहे प्रदर्शनों के हिस्से के तौर पर किए गए थे.
उल्लेखनीय है कि तिब्बत के मुद्दे के प्रति भारत सरकार का रुख़ संवेदनशील रहा है लेकिन हाल के कुछ वर्षों में चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार आया है जिसकी वजह से भारत की तिब्बत नीति में कुछ बदलाव नज़र आ रहा है.
बीजिंग के साथ संबंध बिगड़ने के डर से भारत ने बड़े स्तर पर तिब्बती शरणार्थियों के विरोध प्रदर्शन को सफल नहीं होने दिया.
संवेदनशील मुद्दा
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया, "भारत के साथ हमारे संबंधों में तिब्बत एक अति संवेदनशील मुद्दा है. जिस तरह से भारत सरकार दलाई लामा के समर्थन में स्वतंत्रता की माँग कर रहे तिब्बती शरणार्थियों के साथ भारत सरकार पेश आई हैं हम उसकी प्रशंसा करते हैं."
इस वर्ष चीन में होने वाले ओलंपिक खेलों के विरोध में भारत प्रदर्शन कर रहे तिब्बतियों को पिछले शुक्रवार को धर्मशाला में गिरफ़्तार कर 14 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया था.
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने तिब्बत के मामले को लेकर हो रही बहस के दौरान सोमवार को संसद में कहा, "ल्हासा में निर्दोष लोगों की मौत और हिंसा की ख़बर से हमें दुख पहुँचा है."
इससे पहले प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि उन्हें आशा है कि तनाव का समाधान बातचीत और अहिंसात्मक तरीके से हो जाएगा.
संसद में विपक्ष के कुछ सदस्यों ने प्रणब मुखर्जी के बयान को 'अपर्याप्त प्रतिक्रिया' कह कर आलोचना की थी.