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सोमवार, 17 मार्च, 2008 को 02:08 GMT तक के समाचार

'तिब्बतियों पर गोली नहीं चलाई गई'

एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है कि तिब्बत के शहर ल्हासा में प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों का प्रयोग किया गया.

तिब्बत के क्षेत्रीय गवर्नर क्यूंग्बा पुनकॉग का कहना था कि जैसे जैसे प्रदर्शनकारियों के लिए समयसीमा निकट आती जा रही है, शांति वापस लौट रही है.

उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत हुई जबकि दलाई लामा का कहना है कि चीन की कार्रवाई में कम से कम 80 लोग मारे गए.

पत्रकारों से बातचीत में तिब्बत के गवर्नर ने कहा कि सुरक्षा बलों ने घातक हथियारों का प्रयोग नहीं किया.

उनका कहना था, '' मैं एक ज़िम्मेदार अधिकारी होने के नाते कह सकता हूँ कि गोली बिल्कुल नहीं चलाई गई.''

दूसरी ओर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ल्हासा में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तिब्बतियों का आंदोलन कई अन्य प्रांतों में फैल गया है.

अबा और सिचुआन प्रांतों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ. इस दौरान पुलिस चौकी पर भी हमला किया गया.

उल्लेखनीय है कि तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है.

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आए एक बयान में सरकार ने कहा है कि लोग सोमवार आधी रात तक ख़ुद को प्रशासन के हवाले कर दें. प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों के प्रति नरमी बरती जाएगी.

चीन सरकार ने कहा है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा में स्थितियां अब लगभग नियंत्रित हो चुकी है.

इस दौरान भारी हथियारों से लैस सैकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी शहर की सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं.

चीन सरकार ने विदेशी लोगों को ल्हासा छो़ड़ने की सलाह दी है और जो पर्यटक वहाँ आना चाहते थे, उनकी यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है.

दलाई लामा की चिंता

दूसरी ओर तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि चीन ने तिब्बत में जो हिंसा की है उसकी जाँच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होनी चाहिए.

उन्होंने तिब्बत में मारे गए प्रदर्शनकारियों के लिए चीन को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'सांस्कृतिक जनसंहार' करार दिया है.

दलाई लामा ने कहा कि चीन सरकार ने प्रदर्शनकारियों के आत्मसमर्पण के लिए सोमवार तक की जो समयसीमा तय की है, उसे लेकर वो ख़ासे चिंतित हैं और असहाय महसूस कर रहे हैं.

तिब्बती गुरू ने आशंका व्यक्त की कि अभी तक प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाइयों में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

हालांकि चीन सरकार का कहना है कि इस हिंसा में कुल 10 लोग ही मारे गए हैं.

मारे गए प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत में धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार के लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक शांतिमार्च निकाला.

दलाई लामा ने आशंका जताई है कि यदि चीन अपनी नीति नहीं बदलता है तो तिब्बत में और मौतें हो सकती हैं.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ल्हासा में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई लोग हताहत हुए थे.

अमरीका सहित दुनिया के कई देशों ने चीन से संयम बरतने की अपील की है.

सन् 1989 के बाद से तिब्बत में हुई ये सबसे बड़ी हिंसक घटना है.