शनिवार, 15 मार्च, 2008 को 10:29 GMT तक के समाचार
भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार का कहना है कि उसकी रिपोर्टों के मुताबिक ल्हासा में शुक्रवार को हुई हिंसा में तीस लोग मारे गए हैं.
निर्वासित सरकार ने ये भी कहा है कि उसे ख़बरें मिल रही हैं कि 100 लोगों की मौत हुई है लेकिन वे इसकी पुष्टि नहीं कर सकते.
उधर तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है.
ल्हासा में बड़े पैमाने पर हुई चीन विरोधी हिंसा में दस लोग मारे जा चुके हैं. चीन सरकार ने इसके लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया है.
1989 के बाद से तिब्बत में हुई ये सबसे बड़ी हिंसक घटना है. 1959 में चीनी शासन के ख़िलाफ़ हुए संघर्ष की बरसी पर सोमवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरु हुए थे लेकिन शुक्रवार को हिंसा भड़क उठी.
तिब्बत सरकार ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘अलगाववादियों की साज़िश कामयाब नहीं हो पाएगी’.
सरकारी मीडिया के मुताबिक जो 10 लोग मारे गए हैं उनमें व्यापारी भी शामिल हैं जिन्हें ‘ज़िंदा जला दिया गया’.
लेकिन निर्वासित तिब्बती नेताओं का कहना है कि मरने वालों की संख्या कहीं ज़्यादा है.
हिंसा
उत्तरी भारत में निर्वासन में शासन चला रही तिब्बत सरकार के बयान में कहा गया है कि उन्हें अपुष्ट ख़बरें मिली हैं कि करीब 100 लोग मारे जा चुके हैं.
ल्हासा में एक ब्रितानी पत्रकार ने बताया है कि शनिवार को उतनी हिंसा नहीं हुई जितनी शुक्रवार को हुई थी.
ब्रितानी पत्रकार के मुताबिक कर्फ़्यू का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने वाले लोगों पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े.
चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आए एक बयान में तिब्बत सरकार ने कहा है कि लोग सोमवार आधी रात तक ख़ुद को प्रशासन के हवाले कर दे और ऐसे लोगों के प्रति नरमी बरती जाएगी.
तिब्बत सरकार के प्रमुख कियांगबा पुनकॉग ने 'अलगाववादियों' की साज़िश की निंदा की है.
एएफ़पी के मुताबिक तिब्बत सरकार के प्रमुख ने कहा है कि अब तक पुलिस ने प्रदर्शकारियों पर गोली नहीं चलाई है. अधिकारियों ने शिन्हुआ को बताया कि शुक्रवार को मारे गए लोग आम नागरिक थे जिनमें दुकानदार और होटल के कर्मचारी शामिल हैं.
पश्चिमी देशों ने तिब्बत में हुए प्रदर्शनों पर चिंता जताई है. अमरीका ने चीन से कहा है कि वो संयम से काम ले.
दलाई लामा पर दोष
चीन ने ल्हासा की घटनाओं के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया है.
दलाई लामा ने प्रदर्शनों को तिब्ब्तियों के असंतोष का प्रतीक बताया है .
चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि ये प्रदर्शन 'पूर्वनियोजित' थे और इसके पीछे दलाई लामा हैं.
लेकिन दलाई लामा के प्रवक्ता चाइम आर छोयकयापा ने दिल्ली में इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है.
उनका कहना है कि चीन सरकार तिब्बतियों की समस्या को बंदूक से नहीं सुलझा सकती और उसे तिब्बतियों का मन पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.
उधर तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि ल्हासा की स्थिति को लेकर वो गंभीर रूप से चिंतित हैं.
दलाई लामा ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके चीन से माँग की है वह ल्हासा में बर्बर तरीके से बलप्रयोग करना बंद करे.
उन्होंने कहा है कि तिब्बतियों ने जो प्रदर्शन किए हैं वो चीनी शासन के ख़िलाफ़ लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का प्रतीक हैं.